इच्छा मृत्यु कानून क्या है? euthanasia and living will in india in hindi

What is euthanasia and living will in india 

दोस्तों आज हम इस पोस्ट में euthanasia क्या होता है?, euthanasia कितने प्रकार का होता है? और भारत में  इच्छामृत्यु  कानून क्या है? आदि के बारे में जानेगे .

इच्छा मृत्यु शब्द प्राचीन समय से हमारे समाज में प्रचलित है और बहुत से लोगो के बारे में कहा जाता है की उनको इच्छा मृत्यु का वरदान था या मौत उनकी इच्छा से होती थी. यदि इसके सबसे best example की बात करे तो महाभारत में पितामह भीष्म को भी इच्छा मृत्यु का वरदान था और युद्ध में घायल होने के पर भी 51 दिनों के बाद सूर्य के उत्तरायण में जाने पर ही अपने प्राण छोड़े.

आज हमारा टॉपिक भी कुछ कुछ इससे ही जुड़ा है. वर्तमान में इच्छा मृत्यु क्या है और इसपर क्या कानून बने हुए है. आइए सबसे पहले जानते है की euthanasia (इच्छामृत्यु) क्या है?


इच्छा मृत्यु कानून

इच्छा मृत्यु कानून क्या है? what is euthanasia in hindi?

  Euthanasia ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है, Eu - आसान  और Thanatos - मृत्यु अर्थात आसान मौत.

यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसका ईलाज सम्भव नहीं है या जिससे उसकी life बहुत ही painful हो गई हो. और वो केवल  मेडिकल के सपोर्ट पर ही जिन्दा है. या यूँ कहे तो वो एक जिन्दा लाश के समान है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए जीवन एक सजा बन जाता है और उससे निपटने के लिए उसे इच्छा मृत्यु दी जाती है.

लेकिन हर किसी को euthanasia नहीं दिया जाता बल्कि बहुत ही रेयर केस में ही ऐसा किया जाता है. जिन हालात में व्यक्ति को euthanasia दिया जा सकता है वो निम्न है-

  •  यदि कोई व्यक्ति ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसका कोई इलाज नहीं है और उसकी बॉडी कोई काम नहीं कर रही हो.
  • यदि डॉक्टर्स ने कहा हो की यह ठीक नहीं हो सकता और यह केवल एक जिन्दा लाश के समान है.

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Types of  euthanasia

Normally euthanasia किस प्रकार से दिया जाएगा इस base पर euthanasia 2 प्रकार का होता है -
  •  Active euthanasia ( सक्रिय इच्छामृत्यु )
  • passive euthanasia (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु )


euthanasia in hindi

what is Active euthanasia

यदि कोई person बहुत vegetative state पर पहुँच जाता है अर्थात बहुत ही गलत हालत में पहुँच जाता है तब यदि डॉक्टर्स को लगता है की अब यह ठीक नहीं हो सकता तो उसे injection दे दिया जाता है यहाँ ऐसी कोई दवाई दी जाती है जिससे उसकी मौत हो जाती है.

एक्टिव euthanasia में directly कोई action लेकर उस person को मौत दी जाती है और इसमें किसी  थर्ड person का involve रहता है . इसप्रकार की मौत को mercy killing भी कहा जाता है.

What is Passive euthanasia

इस प्रकार के euthanasia में डायरेक्टली कोई एक्शन न लेकर उसे प्राकृतिक रूप से मरने दिया जाता है. अर्थात यदि कोई व्यक्ति मेडिकल की सुविधा पर जीवित है और उसके ठीक होने की कोई सम्भावना नहीं हो तब उसके जो मेडिकल सपोर्ट होता है वो हटा लिया जाता है, उसके बाद व्यक्ति अपनी स्वाभाविक मृत्यु तक इंतजार करता है.यदि सीधी सी बात करे तो इसमें व्यक्ति को भगवान के भरोसे छोड़ दिया जाता है.


 Euthanasia कहाँ कहाँ legal है?

  हमने ऊपर पढ़ा की एक्टिव euthanasia हत्या करने के समान है और इसी कारण से यह विश्व के लगभग सभी देशो में allowed नहीं है. active euthanasia बहुत कम  देशो में allow है- बेल्जियम , नीदरलैंड, अमेरिका के कुछ स्टेट में .

इसके कनाडा, कोलम्बिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ़्रांस, आयरलैंड, इजरायल, जापान, मेक्सिको etc. देशों में इच्छा मृत्यु allow है लेकिन सभी देशो के अपने अलग अलग कानून और नियम है.

अवसर पर कथन
समय पर कथन
 शिक्षा पर कथन

Euthanasia and living will in India

 इंडिया में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक judgment में passive euthanasia को legal कर दिया है पर जब तक संसद इस पर कोई कानून नहीं बनता तब तक इसके लिए कोर्ट ने guideline दी है और इसी गाइड लाइन के आधार पर काम किया जाएगा.
 इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने living will को भी मान्यता दी है तो आइए जानते है कि लिविंग विल क्या होती है-

लिविंग विल क्या है


what is living will?

  सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की व्यक्ति अपनी ऐसी वसीयत बना सकता  है जिसमे यह उल्लेख हो की उसकी यदि भविष्य में ऐसी कोई हालत बन जाए तब उसके साथ क्या किया जाए या उसे सक्रिय इच्छा मृत्यु दे दी जाए.
लेकिन वसीयत को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ पॉइंट दी है उसी bases पर लिविंग विल बना सकते है.

लिविंग विल कौन बना सकता है ?

  यदि कोइ व्यक्ति अपनी लिविंग विल बनाना चाहता है तो उसे कोर्ट की निम्न गाइड लाइन को complet करनी होगी-

  •  लिविंग विल बनवाने  वाला एडल्ट हो और मेंटली रूप से स्वस्थ हो.
  • उसकी इच्छा से होनी चाहिए.
  • लिविंग विल क्लियर होनी चाहिए . उसमें हर बात स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए .
  • judicial magistrate और 2 गवाह के sign होना चाहिए.
  • किसी एक ऐसे व्यक्ति को चुनना होगा जो आपकी ऐसी स्थिति में डॉक्टर्स को euthanasia के लिए कहेगा.


इस लिविंग विल के तहत इंडिया में पैसिव यूथानासिया दिया जा सकता है. लेकिन कोई भी कानून बनता है तो लोग कुछ न कुछ कमियां निकल ही लेते है तो लिविंग विल को लेकर भी कई लोग सहमत नहीं है. उनका कहना है कि कई लोग जमीन-पैसों के लिए अपने पेरेंट्स को भड़का क्र या उन्हें बहला फुसलाकर लिविंग विल पर sign करवा सकता है, जिससे इस कानून का misuse हो सकता है.

Euthanasia क्यों सही है?

   इच्छा मृत्यु को लेकर लोगो की अलग अलग राय है कुछ लोगो का का मानना है कि इच्छा मृत्यु सही है क्योकि -
  •  यदि व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार है तो उसे सम्मान से मरने का भी हक होना चाहिए.
  •  जब व्यक्ति एक जिन्दा लाश बन जाता है और उसकी लाइफ painful हो जाती है जिससे उसका जीवन नरक बन जाता है.


Euthanasia गलत क्यों है?

 इच्छा मृत्यु को लेकर लोगो का कहना है कि इस कानून का गलत उसे भी हो सकता है और -
  • यह जीवन कुदरत का दिया हुआ है किसी को भी इसे समाप्त करने का अधिकार नहीं होना चाहिए.
  • इससे जो व्यक्ति बीमार है वो उस बीमारी से लड़ने का प्रयास नहीं करेगा और मन ही मन कमजोर होता जाएगा.
  • डॉक्टर्स का काम जीवन देना है तो फिर यह उनके पेशे के खिलाफ होगा.

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इस प्रकार सभी लोगो की इच्छा मृत्यु और लिविंग विल को लेकर अलग अलग राय है. आपकी इस विषय पर क्या राय है? और आपके अनुसार क्या होना चाहिए? इस बारे में आप अपने विचार कमेंट्स बॉक्स में जरुर रखे. 



विरम सिंह
विरम सिंह

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