माँ का ख़त बेटे के नाम

दोस्तो एक बुढ़ी माँ परदेश मे बस गए अपने लाडले बेटे को खत लिखती है । और उसे घर के हालात और अपनी व्यथा की दुहाई देकर एक बार घर आने का आग्रह करती है । आप के दिल को छू जाने वाला "माँ का खत बेटे के नाम "

maa ka khat


प्रिय बेटा
स्नेहाशीष
       बेटा तुम जहाँ हो कुशल मंगल होगे ऐसा मेरा दिल कहता है । बेटा तुमने गांव से जाने के बाद हमारे हालचाल तो नही पूछे शायद तुम्हारे पास समय नही होगा । इसलिए मै बता देती हू यहाँ सब राजी खुशी है ।
   बेटा जब यह खत तुम्हे मिलेगा तो निश्चित ही तुम्हे मेरी याद आएगी और आँखो से आँसू निकल आऐगे । पर बेटा आँख मत बहने देना , क्योंकि बेटा मै तुम्हारी आँखो मे आँसू नही देख सकती ।

☆ बेटा तेरे बाबा ने तुम्हे आशीर्वाद भेजा है ।   बेटा तेरे बाबा गांव मे सीना चौडा करके घुमते है और सभी को कहते है कि मेरा बेटा परदेश मे है । लेकिन बेटा वे अन्दर से बहुत अकेले है । आज वो बाँस की लाठी के सारे चलते है उनके बुढापे की लाठी तो परदेश मे है  ।
बेटा तेरे बाबा बुढापे मे भी इतना काम करते है जितना तुम छोटे थे तब करते थे । आज जब काम करते थक जाते है तो पानी के लिए तेरा ही नाम पुकारते है ।

☆ बेटा तेरी लाडली बहना सयानी हो गई है । उसके भी हाथ पीले करने है । तेरी बहना वर्षो से राखी पर चुप चुप करके रोती है इसलिए की कई उसके आँसू तेरे बाबा और मुझको कमजोर न कर दे ।
☆  बेटा  मेरा तो क्या ? तू खुश है तो मै तो सदा खुश हूँ  । बेटा जब तुम पैदा हुए थे तब मैने और तेरे बाबा बड़े सपने संजोए थे । तेरे बाबा तुझे पढा कर बड़ा अफसर बनाना चाहते थे लेकिन तुम तो इतना बड़ा बन गया कि अपने माँ - बाप को भूल गया  ।
बेटा इस आखातीज पर रामलाल जी ने अपने बेटे की शादी  बड़े धूमधाम से की , बेटा तेरे बाबा भी तेरी शादी ऐसे ही धूमधाम से करना चाहते थे पर तुम तो ..........

☆ बेटा तुझे यहा से गए 8 साल हो गए पर बेटा तुमने एक बार भी अपनी बुढ़ी माँ का हाल नही पूछा ।
बेटा कुछ समय तक तु रूपये भेजता था पर अब वो भी भेजना बन कर दिया ।
बेटा हमे कागज के टुकडे नही चाहिए।  मेरे जिगर के टुकडे एक बार अपनी माँ को मिलने आ जा ।
☆ बेटा यहाँ पर लोग कहते है कि तुमने वहाँ ब्याव कर लिया होगा और अब तुम यहा नही आओगे । बेटा यदि यह सच है तो एक बार मुझे अपनी बहू का मुँह तो दिखा दे । बेटा एक बार तो आ जा , अपनी दुखियारी माँ की तो पुकार सुन ।

☆  बेटा शायद तुम्हे याद होगा कि तुम्हे पढाने  के लिए हमने अपने पुरखो की दि हुई जमीन गिरवी रखी थी । बेटा तुम तो जानते ही हो हमारे लिए जमीन माँ है , बेटा अपनी माँ को मुक्त कराने के लिए तो एक बार आ जा ।
बेटा यहा की हालत तो ओर भी विकट है पर मेरे आँखो के तारे मै तुझे यह सब बता कर दुखी नही कर सकती।
बेटा जब गाँव मे कोई गाडी आती है तो चौखट पर आ जाती हूँ इसी आस मे की मोटर मे तू आया होगा ।
लेकिन तुने तो हमारी सुध लेने की भी कोशिश नही की । लेकिन बेटा बस एक बार आ जा । बेटा इन कानो मे अब सुनाई नही देता पर  तेरे मुँह से माँ सुनना चाहते है ।

● बेटा अपने बुढे बाबा को पानी पिलाने एक बार तो आ जा  ।
● अपनी बहना की डोली डोली उठाने तो आ जा फिर चाहे मेरी अर्थी को काँधा देने मत आना ।
● बेटा अपनी माँ को मुक्त कराने एक बार तो आ जा ।
बेटा एक बार तो आजा ।
बेटा एक बार ............
तुम्हारे इंतजाम मे
तुम्हारी
माँ



विरम सिंह
विरम सिंह

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