आरक्षण का भुक्तभोगी हिन्दी कहानी story on reservation


Story On Reservation Policy

हिन्दी कहानी " आरक्षण का भुक्तभोगी  "

'Good Morning Sir ' चपरासी ने विनम्रता के साथ  Files को Set कर रहे बड़े साहब का अभिवादन किया ।
'Good Morning , और रामलाल क्या हालचाल है? ' अपनी नजर उठाये बिना ही सिंह साहब ने पूछा ।
'सब ठीक है साहब! हमारे जिले के कलेक्टर साहब Transfer हो गया है ।'  रामलाल ने जानकारी देते हुए कहा ।
' क्या? कौन आया है अब उनकी जगह ' सिंह साहब ने आश्चर्य से पूछा ।
' कोई वर्माजी है साहब । '

reservation


'अच्छा ठीक है तुम जाओ और सुनो आज का अखबार चेम्बर मे पहुंचा देना ।' सिंह साहब ने आदेश देते हुए कहा ।
'जी साहब '
सिंह साहब अपने काम मे Busy हो गये और Table पर बिखरी फाइलों को निपटाने लगे।
इतने मे रामलाल अखबार लेकर आ गया और  पेपर Table पर रख कर चला गया ।

सिंह साहब फाइलों के ढेर से अपने आप को बाहर निकाल कर अखबार पढने लगे ।
' अरे यह क्या ? इसे तो मै जानता हूँ ।' अखबार मे छपी Photo देखकर मन ही मन कहा ।

स्मृति पटल पर पुराने दृश्य उभर कर सामने आने लगे । बचपन मे हम दोनो साथ ही पढते थे और हमेशा साथ साथ स्कूल जाते थे । हम दोनो के हालात एक जैसे ही थे । पर वर्माजी की जाति आरक्षण पाने वाली मे से थी इसलिए उसे Government की तरफ से Help भी मिलती थी। लेकिन मुझे कुछ नही मिलता था क्योंकि मे General Category से था ।

12 वी की परीक्षा First Division से Pass करने के बावजूद शहर की College मे प्रवेश नही मिला । जबकि वर्माजी के काम Marks के बावजूद selection हो गया ।

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उस वक्त मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ ऐसा क्यो?
तब मेरा आरक्षण से पहली बार सामना हुआ   । उसके बाद तो यह सिलसिला चलता ही रहा । अच्छे Marks आने के बावजूद भी न कोई Government की तरफ से छात्रवृति मिलती और न कोई सरकारी नौकरी मे फायदा मिलता । लेकिन आरक्षण से कम अंक वाले आगे आने लगे और Government Job पाने लगे ।

कडी मेहनत और नियमित परिश्रम से RAS Exam मे अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद भी Selection नही हुआ और वर्माजी का आरक्षण ( Reservation ) की वजह से कम नंबर आने के बाद भी सलेक्शन हो गया।
योग्यता होने के बावजूद वे सिर्फ एक सरकारी बाबू बन कर रह गए । और कई सालो से प्रमोशन नही हुआ लेकिन वर्माजी Promotion से कलेक्टर बन गये ।

अखबार मे छपी अपने बचपन के दोस्त की Photo देखकर मन ही मन खुश हो रहे थे कि   उनका Friends आज बडी पोस्ट पर पहूँच गया ।
लेकिन एक ओर यह सोच कर दुखी हो रहे थे कि इस देश का क्या हाल होगा ?

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जब कम नंबर वाले अफसर बन रहे है और ज्यादा नंबर वाले बेरोजगार घुम रहे है।
जहाँ देखो वहा Reservation का ही बोलबाला है।  सिंह साहब मन ही मन इस व्यवस्था को कोसने लगे ।
फोन की घंटी के साथ ही स्मृति से बाहर आए और Phone Received किया " हैलो "
' हैलो, पापा मै बोर्ड परीक्षा मे जिले मे प्रथम स्थान पर आया हूँ '  सिंह साहब के बड़े बेटे हनी ने उत्साह के साथ जानकारी दी ।
' बहुत अच्छा, शाबास बेटा' कहकर सिंह साहब ने फोन काट दिया ।

मन ही मन कहने लगे ' बेटा मै जानता हूँ मै आरक्षण का भुक्तभोगी हू मुझे पता है कि क्या फायदा मेरिट मे आने का । आरक्षण प्रतिभा को दबा देगा कभी आगे बढने नही देगा और बेटा तुम्हे इसका आभास हो जाएगा ।
खैर जो होगा देखा जायेगा  । बेटा तुम Success हो और आशा करूगा की तुम "आरक्षण के भुक्तभोगी " न बनो ।
दिल से बेटे को दुआ देते हुए सिंह साहब फाइलों के साथ माथापच्ची करने लगे ।


दोस्तो आपको हमारी यह " आरक्षण का भुक्तभोगी" कहानी कैसी लगी और आपके आरक्षण पर क्या विचार है comments box मे जरूर बताय और यदि अच्छी लगे तो अपने दोस्तो के साथ जरूर share करे ।


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राजस्थानी लोक साहित्य में प्रेरक कथन Hindi Motivational Quotes


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राजस्थानी लोक साहित्य में नीतिगत तत्वों की बात करे तो पता चलता है कि राजस्थानी लोक साहित्य समृद्ध है तथा प्रत्येक मनुष्य के लिये नैतिक आचार संहिता का कार्य करता है ।
   राजस्थानी साहित्य में यश प्राप्ति को सदा से सर्वश्रेष्ठ माना है। इस यश के सामने भौतिक सुख और सम्पदा सदा से गौण है और यह तभी संभव है जब इस प्रकार की सीख मिले –
   मूरत सुन कीरत बड़ी , बिन पांखा उड़ जाय।
  मूरत तो मिट जावसी, कीरत कठे न जाय ।।

मनुष्य जीवन के लिये लाभाकारी और फलदायी बातों की सीख लोक काव्य में पग पग पर मिलती है और इन बातो में जीवन का निचोड़ होता है -                                                                
    बलता तो दीपक भला, वलता भला विघन्न।
  गलता तो वैरी भला, वलता भला सुदिन्न ।।
विद्या वापरती भली, भरतो भलो निवाण।
पंडित तो कथतो भलो , स्रोता भलो सुजाण ।।
चन्दण री चिमठी भली, गाडों भलो न काठ ।
चातर तो एक ही भलो, मूरख भला न साठ ।।
नित को भलो न बरसनो , नित की भली न धूप ।
नित को भलो न बोलणो , नित की भली न चूप ।

“ राजस्थानी वात “ , राजस्थानी लोक साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग है, इन बातों को मांडने (कहने) से पहले कुछ छोगे कहे जाने की परम्परा है । इन छोगों में नीतिगत सीख भरपूर होती है और ये होते भी बड़े सरस है –
 बात सांची भली, पोथी बांची भली।
देह साजी भली, बहु लाजी भली ।।
लुवां बाजी भली, नौबत गाजी भली ।
मौत मौड़ी भली, मनसा थोड़ी भली ।।
घाव पाटी भली, भाख फाटी भली ।
मैथी फाकी भली, साख पाकी भली ।।
पंथ गाड़ी भली,  भैंस पाडी भली ।।

इन्ही छोगों में संसार के खोटे कामों से भी अवगत कराने के लिये नसीहत दी जाती है कि –
  भोजाई रो बोल खोटो, रुपिया रो रोल खोटो ।
बानिया रो आसो खोटो, जेल रो बासो खोटो ।
अकलियै रो लाटो खोटो, बामण रो आटो खोटो ।।
अवड बिचै छाली खोटी, खेत बिचै बाली खोटी ।।
बाबोजी रै चेली खोटी, घर आली तो बोली खोटी ।।

लोक जीवन से जुड़े फलदायी व दुखदायी पहलुओ का प्रगटीकरण भी इन्ही छोगों में होता है –
   सियाले रो मेह भून्ड़ो , तिरिया बिना गेह भून्ड़ो ।
ऊगोनो तो खेत भून्ड़ो, परनारी सु नेह भून्ड़ो ।।
भगतन सु हेत भून्ड़ो, उधारी बौपार भून्ड़ो।
विधवा रो बनाव भून्ड़ो, साधू वालो हेत भून्ड़ो ।।
मौसर री रीत भुंडी, दासी सु प्रीत भुंडी ।
पाड़ोसी सु राड़ भुंडी, काँटा री तो बाड़ भुंडी ।।
डुंगर री चड़ाई भुंडी, सांसी सु लड़ाई भुंडी ।
आकड़े री राख भुंडी, दिवालिये री साख भुंडी ।।
खीचड़ में लादो भून्ड़ो, घरे हिलियो खोदो भून्ड़ो ।।

आज all world में पर्यावरण को लेकर बड़ी चिंता व्यक्त की जाती है लेकिन यहाँ का लोक तो सदैव से कहता आया है –
  आक न अहलो काटिये, नीम न घालो घाव ।
जो रोहीड़ो काटसी, दरगा होसी न्याव ।।
पीपल काटे हल खड़े, धन कन्या को खाय ।
सींव तोड़ खेती करे, जड़ा मूल सु जाय ।।

राजस्थानी लोक साहित्य का नीति तत्व जीवन के गहरे अनुभवों का निचोड़ है और इसमें कष्ट सहन करके भी मानवता को न छोड़ने की प्रेरणा दी जाती है ।
आपको हमारी यह सीख से भरी हुई post कैसी लगी , comment करके जरुर बताये ।

जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा hindi Patriot Poem independence day 2018



कविता 




उस दिन आसमां भी बिलखा होगा,
जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा ।


अस्ताचल को जाता भानू भी ठिठका होगा,
जब डोली मे बैठी बहना को शहीद भाई का मुँह दिखाया होगा ।।


आँगन मे बैठी बुढ़ी माँ का आँचल भी दुध से भीग गया होगा ,
जब शहीद जवान बेटे की देह को सीने से लगाया होगा ।।

काल भी अपने किए खोटे काम पर पछताया होगा ,
जब मेंहदी वाले हाथो ने अपनी माँग को मिटाया होगा ।


यमलोक में यमदेव भी चुपके चुपके बिलखे होंगे ,
जब दुध पीते बेटे ने शहीद पिता को अग्नि दी होंगी ।


उस दिन आसमां भी बिलखा होगा , 
जब सीमा पर जवान शहीद हुआ होगा ।

विरम सिंह सुरावा





स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 2018 independence day speech in hindi

india's independence day speech for students



hello friends 15 अगस्त को हमारा देश भारत आज़ाद हुआ था इसलिए इस दिन को स्वतन्त्रता दिवस independence day के तौर पर मनाते है... आज हम इस पोस्ट में independence day पर speech पोस्ट कर रहे है जिसको आप school, college में बोल सकते हो.. 

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independence day image
  आज यहाँ पधारे मुख्य अतिथि महोदय, अध्यक्ष महोदय और मेरे साथी भाईयों और बहनों ..... आप सब जानते है की आज हम देश की आज़ादी की याद  को ताज़ा करने के लिए इस तिरंगे के निचे एकत्रित हुए है...
 इस ख़ुशी के मौके पर मे आपके सब के सामने अपने विचार रख रहा हूँकई त्रुटी हो तो सुधार करे...

आज़ादी पर भाषण  independence day speech

 

आज हम को आजाद हुए 71 वर्ष हो गये है. 15 august 1947 के दिन 200 वर्षों से चले आ रहे अंग्रेजी हुकुमत से आज़ादी मिली थी. जंजीरों में जकड़ी भारत माता की बेडियाँ टूटी.... तिरंगा शान से लाल किले पर लहराने लगा और समाज का हर व्यक्ति ख़ुशी से झूम उठा था.....

यह सब अविस्मरणीय था और हजारों लोगों के संघर्ष और सैकड़ों लोगों के बलिदान के बदौलत आज़ादी प्राप्त हुई थी... इसी पल को फिर से ताज़ा करने और आज़ादी के खातिर बलिवेदी पर चढ़े उन वीरों की शाहदत को नमन करने के लिए हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाते है.

कई वर्षो तक आज़ादी के दीवानों ने संघर्ष किया और अपने प्राणों की आहुति दी... तब जाकर हमे आज़ादी मिली है.. और हम चैन की साँस ले पा रहे है...

71th independence day 15 august speech



अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे सैकड़ों नौजवानों ने यौवन के सुखों को ठोकर मारकर भारत माँ की आज़ादी के लिए फाँसी वाले फंदे हो हंसते हंसते चूम लिया था...अपने घर परिवार को छोड़ कर देश की आज़ादी के खातिर कई कष्टों का सामना किया और अपने पथ पर अडिग रहे...

लेकिन क्या आज हम उनके त्याग से प्राप्त हुई आज़ादी से उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे है?? जैसा देश बनाने के लिए आज़ादी के दीवानों ने बलिदान दिए, क्या हम ऐसा देश बना रहे है??  जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी जा रही थी तो उनकी आँखों में आंसू नहीं थे बल्कि होठो पर मुस्कान थी क्योंकि उन्हें विश्वास था की उनके बलिदान से लगो लोग जागेंगे और जिससे से देश आज़ाद होगा तथा हर व्यक्ति सुख की साँस लेगा.....
independence day flag



लेकिन आज़ादी के इतने वर्षो के बाद भी हम उनके सपनों को हकीकत में नहीं बदल पाएं है.... आज भी कई प्रकार की समस्या सुरसा के मुंह की तरह बढती ही जा रही है.. जिसमें  अशिक्षा, भ्रष्टाचार प्रमुख है...

 आरक्षण व्यवस्था पर निबंध


इतने वर्षों के बाद भी समाज का बड़ा तबका शिक्षा से वंचित है... कई लोग तो प्राइमरी लेवल की भी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे है.. देश के विकास के लिए every person को educated होना बहुत जरुरी है... education एक सभ्य नागरिक बनता है और शिक्षित व्यक्ति देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाता है... परन्तु इतने वर्षो के उपरांत भी अब भी इस field में काफ़ी प्रयास करने जरुरी है...


essay on independence day in hindi



 education सभी को मिले इसमें हमारा भी कर्तव्य है हम अपने आस पास के लोगों को शिक्षा के लिए जागरूक करे.. यह भी एक प्रकार की देश सेवा है....

दूसरी बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है ... लेकिन देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए हम ही जिम्मेदार है..हम लोगो ही ऐसे भ्रष्ट नेताओं को सलेक्ट करके संसद में भेजते है और फिर हम system को जिम्मेदार ठहराते है... रिश्वत खोरी आज एक बड़ी समस्या हो गई है लेकिन इसकी शुरुआत भी हम ही करते है ... हमारा काम जल्दी हो जाए इसी लालच में कुछ पैसे दे देते है जिससे हमारा काम तो जल्दी हो जाता है लेकिन समाज में एक न्य राक्षश पैदा हो जाता है...

कुछ पैसों से शुरू हुई उसकी लालच भी बढती जाती  और वो बड़ी रकम मांगता है इस प्रकार इनके लिए कई न कई हम ही जिम्मेदार है....

आज स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर यह शपथ ले की न तो रिश्वत लेंगे और न ही किसी को रिश्वत देंगे... आज के दिन उन हजारों वीरों को यह सच्ची श्रदांजली होगी....  आज़ादी के लिए उन्होंने तो अपने प्राण दे दिए आब उनकी शोणित से प्राप्त आज़ादी को यूँ सस्ती मानकर इसको मत गंवाना ...

जय हिन्द
जय भारत

आपके काम की पोस्ट

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सफलता और मेहनत पर अनमोल कथन | success quotes in hindi

दोस्तो life मे प्रत्येक व्यक्ति success होना चाहता है और वह चाहता है कि वो हमेशा सफल ही होता रहे जो कि बहुत मुश्किल है । 
हम आज  " सफलता, मेहनत और समय " पर प्रसिद्ध कथन post कर रहे है जो आपको जरूर पंसद आऐगे ।
दोस्तो बिना मेहनत और समय प्रबंधन के सफलता नही मिल सकती  । 


Success, Hard Work, Time Management


Motivational quotes


"इतिहास बताता है कि बड़े- बडे विजेताओ को भी जीत से पहले हताश कर देने वाली बाधाओं का सामना करना पड़ा । उन्हे जीत इसलिए मिली कि वे अपनी असफलताओ से निराश नही हुए ।"
                             बी.सी. फोर्ब्स

Best Hindi quotes


"लक्ष्य ना ओजल होने पाये ।
    कदम मिला के चल ।
सफलता तेरे कदम छुएगी ।
आज नही तो कल ।।"

Hard Work quotes


"जब मै थक जाता और थक कर रूक जाना चाहता था, तो मुझे उत्सुकता होती थी कि मेरा प्रतिद्वंद्वी इस समय क्या कर रहा होगा । जब मै सोच में देखता कि वह अभी भी प्रैक्टिस कर रहा है तो मै ओर मेहनत करता । और जब मै देखता कि वह थककर आराम कर रहा है तो मै और भी कडी मेहनत करने लगता ।"
              डाॅन  ( गैबल ओलंपिक मे कुश्ती मे स्वर्ण पदक विजेता )






"मै आधे दिन काम करना चाहता हूँ । मुझे इसकी कोई परवाह नही कि यह पहले के 12 घण्टे है या बाद के 12 घंटे ।"
                 - कैमंस विल्सन

हमेशा ध्यान रखिये कि आपका सफल होने का संकल्प का संकल्प किसी भी और संकल्प से महत्वपूर्ण है ।"
आप जितनी ज्यादा मेहनत करते है, उतने ही किस्मती बनते जाते है ।
               गैरी प्लेयर
एक आदमी अपने काम मे अपनी शक्ति ( Power ) और योग्यता ( Ability ) का केवल 25 % ही इस्तेमाल करता है। दुनिया उन लोगो का सम्मान करती है जो अपनी 50 %   Ability तक का इस्तेमाल करते है और उन गिने चुने लोगो को सिर आँखो पर बिठाती है, जो अपनी क्षमता का 100 फीसदी इस्तेमाल करते है।
                         एंड्रयू कार्नेगी


"आलोचक वो होता है जो दाम तो हर चीज का जानता है , लेकिन उन चीजो का महत्व नही ।"
                        आस्कर वाइल्ड

Time Management


अपना अमूल्य समय व्यर्थ की बातो मे बर्बाद न करे उससे तो अच्छा है कि 2 घंटे नींद ले लो क्योंकि व्यर्थ की बातो से आपका मन खराब हो जाएगा और दो घंटे नींद लेने से आपका तन तंदुरूस्त हो जाएगा ।
                        स्वामी रामसुखदास

" सुबह बनने के लिए हर शाम को ढ़लना होता है ।
बनने के लिए मोती बर्फ को पिघलना होता है ।
हाथ पर हाथ धर कर ही बैठे मत रहो तुम ।
पाने के लिए मंजिल हर इंसान को चलना होता है ।।"



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अवसर को पहचानिए और बनिए विजेता How to success in life


जीवन मे आने वाले उतार - चढ़ाव जिस व्यक्ति को परेशान नही करते ,वो ही विजेता बन सकता है । विपरीत परिस्थिति मे हि विजेता की पहचान होती है । मुश्किल हालात मे भी विजेता हिम्मत और मेहनत से अवसर बनाते है । काम के प्रति उनकी ललक और कमिटमेंट उनको भीड़ से अलग बनाता है । यदि आप अपने आप को सफल बनाना चाहते है तो आपको अपने आसपास बिखरे हुए अवसरो पर नजर दौड़ानी होगी । और उन अवसर को सफलता मेह बदलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी ।  अपने सपने साकार करने के लिए खुद को कड़ी मेहनत करनी जरूरी होती है । इसलिए हमेशा खुद को motivate करते रहे और अपने काम मे लगे रहे ।


How to be successful in life


विचार नही , कर्म करे 

    जब साधारण व्यक्ति चीजों को मंत्रमुग्ध हो कर देखते रहते है , तब असाधारण व्यक्तित्व के धनी लोग उन चीजों की Help से अपने सपनो को पूरा करने का रास्ता तैयार करते है । विजेता हमेशा किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचाने मे माहिर होते है । वे छोटी मोटी परेशानी से घबराते नही है बल्कि उनका डटकर के सामान करते है ।

 विजेता कर्म पर ध्यान देते है । इसलिए यदि आप life मे success होना चाहते है तो विचार मत किजिये कर्म किजिए । जिससे आप अपने सपने पूरे कर सकते है । गीता मे भी लिखा हुआ है कि " हमे कर्म करते रहना चाहिए , फल की इच्छा नही करनी चाहिए ।"
आप जिस work मे success होना चाहते है उस मे अपनी पूरी ऊर्जा लगा दे तो आप निश्चित ही  सफल होगे ।

भागवत गीता पर अनमोल कथन
कर्म पर अनमोल वचन

रिस्क लें, मिलेगी सफलता 

    विजेता आमतौर पर बड़ी रिस्क लेना पंसद करते है । उन्हे जब भी कही अवसर दिखाई देते है वे हाई रिस्क और हाई रिवार्ड के माध्यम से उनका विस्तार करते है । क्योंकि वे जानते है कि रिस्क लेने से life मे कुछ बेहतर पा सकते है । हो सकता है की सभी काम मे उन्हे सफलता नही मिलती, पर वे रिस्क लेना नही छोड़ते है ।

आप यदि life को बेहतर बनाना चाहते है तो रिस्क लिजिए । क्योंकि हम जानते है कि "डर के आगे जीत है।"  आज जितने भी successful लोग है सबने अपनी life मे रिस्क ली है तभी वे success हुए है।

jindgi men safal kaese ho

कभी भी करे शुरुआत 

    यदि आप सोच रहे होंगे कि हम तो दुनिया से बहुत पीछे है अब अपना काम start करूंगा तो वो सफल होगा या नही ?
Dosto आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि "जब जागो तब सवेरा" इसलिए कोई भी work starts करने के लिए वर्तमान से Best Time कोई नही है ।

Google कोई पहला सर्च इंजन नही था , Facebook और Twitter कोई प्रथम Social Sites नही थी । money transfer और payment company PayPal भी पहली नही थी इसके बावजूद ये अपनी अपनी industry मे सफल हुई है । ऐसा इसलिए हुआ , क्योंकि इन्होंने कुछ नया पेश किया ।

इसलिए अब भी कोई देर नही हुई है आप कभी भी काम चालू कर सकते है । और अपनी मेहनत तथा कुछ नया करने की ललक आपको सफलता दिला सकती है ।

समय पर अनमोल वचन

असफलता का सामना

     ऐसा कोई नही कहा सकता की winner कभी fail नही होते । उन्हे काफी असफलता मिलती है लेकिन वे अपनी स्प्रिट को कमजोर नही होने देते । वे हमेशा विफलता के बाद तेजी से उभरते है । विजेता हमेशा बड़े लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित करते है और वे धैर्य के साथ लगातार काम करते रहते है । तभी तो वे विजेता कहलाते है ।

  यदि हमे अपने जीवन मे असफलता मिलती है तो उससे घबरा कर बैठना नही चाहिए बल्कि नए जोश के साथ उस काम को करने मे दोगुनी ऊर्जा लगानी चाहिए ।  life मे असफलता सभी को मिलती है । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को कौन नही जानता ? वे कितनी बार चुनाव हारे ? इसके बावजूद उन्होंने अपना आत्मविश्वास तथा हौसला नही खोया और आखिर कार वे अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए । इसलिए असफलता को सफलता की सीढ़ी बनावे ।


आपको हमारा यह " अवसरों को पहचानिए और बनिए विजेता " लेख कैसा लगा अपनी राय comments box मे जरूर रखे ।


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मै और मैना का रहस्य Best inspirational story in hindi



Best inspirational story in hindi



Hindi Motivational Story

 
एक किसान के घर पर बकरी भी थी और मैना भी थी ।  दोनों ही बोलती रहती थी । किसान की old mother बकरी की ‘मै – मै ‘ आवाज सुनकर बहुत नाराज होती थी । उसे गुस्सा आता तो वह डंडा लेकर उस पर वार कर देती थी। कभी उसके कानो में मैना की मधुर आवाज गूंज उठती –“मैना, मैना, मैना....” वर्षो तक यह क्रम चलता रहा । एक दिन कबीरदास उस किसान के घर आये । 

किसान की बूढी माताजी ने कहा –“ कबीरदासजी ! आप तो अनुभवी संत हो महाराज ! मे परेशान हूँ की बकरी और मैना दोनों बोलते है पर जब बकरी की आवाज गूंजती है तब मुझे जरा भी नहीं सुहाती है।”

“ माताजी ! आपको बकरी की आवाज अच्छी नहीं लगती पर मैना की आवाज तो अच्छी लगती होगी ?” कबीरदासजी ने पूछा ।

“ हाँ महाराज ! मैना की मीठी मीठी आवाज से मै ही क्या हर सुनने वाला मस्त हो उठता है ।” वृद्धा बोली ।

“तो बताओ  मैया! मैना का गाना आपको इत्नस मीठा क्यों लगता है। ।"

“मै नही जानती बाबा पर यह बात ठीक है कि दूध देने वाली गाय की लात तो सही जाती है पर दूध देने वाली बकरी की बेसुरी आवाज नहीं सुनी जाती । आप ही बताइये बाबा कि ऐसा क्यों होता है । 

"वृद्धा ने अपनी बात तसल्ली से कही 
    तब कबीरदासजी ने समझाया –“ अम्मा जी दोनों ही अपने मन की बात कहती है । कहने के पीछे जो भाव है बस उसका ही फर्क है ।"  

 “कबीर महाराज! मै समझी नहीं यह फर्क क्यों है? आप जरा मुझे अच्छी तरह समझा दो ताकि मै बकरी से नाराज न रहूँ ।” वृद्ध ने आग्रह किया ।

कबीरदासजी ने तब समझाते हुए कहा –“ मेरी मैया ! मैना मीठे सुर में जब मै ना , मै न, मै ना कहती है तब मै नहीं , मै नहीं, इस बात को कहकर अपने मन के छोटेपन और संकुचित दृष्टिकोण से अनायास ही मुक्त हो जाती है । इसलिए उसके बोल सभी को अच्छे लगते है । इधर बकरी बोलती है तो ‘मै-मै-मै ‘ की आवाज गूंजती रहती है। इसलिए उसका बोलना अच्छा नहीं लगता । उसमे उसका अहं जो बोलता है ।"

          “ हाँ बाबा! मै अब समझ गई, अपने आपको संकुचित दृष्टिकोण से मुक्त रखना चाहिए ।"
   इस व्यावहारिक सत्य का वृद्धा को बोध करवाकर कबीरदासजी चल दिए अपनी रहा |

इस प्रसंग से हमें सीख मिलती है की हमें हमारे बोल मीठे रखने चाहिए और अहं भाव से ग्रसित बोल नहीं बोलने चाहिए , क्योकि लोगो को अच्छे वचन प्रिय होते है इसलिय तो कोयल और कौए का रंग एक होने के बावजूद लोग मीठे बोल बोलने वाली कोयल को पसंद करते है   

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गंगाजी धरती पर कैसे आई 

गंगाजी धरती पर कैसे आई Best Hindi Story

       
रहस्यमयी कहानी
             
राजा सगर ने एक बार अश्वमेघ यज्ञ किया । अश्वमेघ यज्ञ के लिये जो घोडा छोड़ा था, उसे इन्द्र ने चुरा लिया ।  राजा सगर के पुत्र उस घोड़े को तलाश करने निकले । घोड़े को तलाश करते हुए सगर पुत्र कपिल मुनि के आश्रम के पास पहुंचे । सगरपुत्रो को कपिल मुनि के आश्रम के पास घोडा दिखाई दिया । उन्होंने कपिल मुनि को ही  चोर समझकर इसके लिये तिरिस्कृत किया ।  कपिल मुनि तपस्वी और पराक्रमी थे । मुनि का तिरिस्कार करने के कारण सगर पुत्र वही स्वत: जलकर भस्म हो गये ।
राजा सगर की दूसरी पत्नी से असमंजस नामक पुत्र हुआ । असमंजस के अंशुमान नाम का पुत्र पैदा हुआ । अंशुमन अपने दादा की सेवा करता था । अंशुमन अपने चाचाओ की खोज में निकला और खोज करता हुआ जब वह जा रहा था, तो उसे कपिल मुनि मिले ।  अंशुमान ने ऋषि को प्रणाम किया और उनकी स्तुति की । भगवान कपिल ने तब अंशुमान को बताया कि बेटा यह घोडा तुम्हारे पितामह का यज्ञ पशु है , इसे तुम ले जाओ । उन्होंने अंशुमान को उसके चाचाओं के भस्म होने की बात भी बताई | मुनि ने अंशुमान को उसके चाचाओं के उद्धार का उपाय भी बताया कि उनका उद्धार केवल गंगा जल से ही हो सकता है । अंशुमान वहा से अपने पितामह राजा सगर के घोड़े को लेकर आया । राजा सगर ने फिर अश्वमेघ यज्ञ पूरा किया ।

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अंशुमान ने अपने चाचाओं के उद्धार के लिये गंगाजी को लाने के लिये बहुत तपस्या की , पर सफल नहीं हुए । अंशुमान के दिलीप नामके पुत्र थे और दिलीप के पुत्र हुए भागीरथ । अंशुमान के पुत्र दिलीप ने भी गंगाजी को धरती पर लाने के लिए कठोर तपस्या की ।  परन्तु वे भी सफल नहीं हुए  । इसके बाद भागीरथ ने घोर तपस्या की । भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगाजी ने उससे वर मांगने को कहा । भागीरथ ने कहा मातेश्वरी आप मृत्यु लोक में जीवो का कल्याण करने के लिये धरती पर आएँ ।

 गंगाजी ने कहा जब में धरती पर आऊ तो मेरा वेग धारण करने वाला भी कोई होना चाहिए ।  भागीरथ ने उत्तर दिया की भगवान शंकर आपका वेग धारण कर लेंगे । इसके बाद भागीरथ ने भगवान शंकर की तपस्या की और इसके लिये भगवान शंकर को प्रसन्न किया । भगवान शंकर ने गंगाजी को अपने सिर पर धारण किया । राजा भागीरथ आगे आगे चलते रहे और गंगाजी पीछे – पीछे । गंगासागर के संगम पर पहुंचकर गंगाजी ने राजा सगर के स्वत: जलकर भस्म हुए पुत्रों को अपने जल से पवित्र कर उनका उद्धार किया ।
         गंगाजी के बारें में कहा भी गया है-

   काया लाग्यो काट, सकलीगर सुधरै नहीं ।
   निर्मल होय शरीर , तो भेट्यां भागीरथी ।।

आपको हमारा यह गंगाजी पर लेख कैसा लगा कमेन्ट करके जरूर बताय ।





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