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शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की जीवनी Bala Saheb Thackeray biography in hindi


बाला साहेब ठाकरे  की जीवनी

इंडिया में ऐसे बहुत से लोग हुए है जिन्होंने अपनी खुद ही पहचान बनाई और अपने समय में उनका कोई सानी नहीं था... ऐसे ही लोगो में से थे बाल केशव ठाकरे जिन्हें लोग बाला साहेब ठाकरे के नाम से बुलाते थे...
बाला साहेब ठाकरे एक ऐसा नाम जिससे अच्छे अच्छे कांपते थे.. उनकी आवाज सुनकर कईयों की हेकड़ी निकल जाती थी.. वो एक शेर थे..बब्बर शेर .. जिसकी एक आवाज से मुंबई खुलती और बंद हो जाती थी...


मराठियों के हकों की लड़ाई से शुरू हुआ उनका कार्य बहुत जल्द हिन्दुत्त्व के लिए बदल गया.. वे खुलकर कहते थे की यदि हिन्दुओं का खुलकर जीना है तो उन्हें लड़ना होगा... यदि सम्मान की जिन्दगी जिनी है तो लड़ों... अपने हक के लिए लड़ो...

बाला साहेब को लोग हिन्दू हृदय सम्राट कहते है...उनका एक किस्सा बहुत जाना माना है - ' एक बार आतंकवादियों ने कहा की कोई भी अमरनाथ के लिए यात्री नहीं जायेगा यदि जायेगा तो जिन्दा वापिस नहीं आएगा ...' इस वजह से अमरनाथ यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे... तब बाला साहब ने कहा था कि -' हज के लिए 99% फ्लाइट्स मुंबई से जाती है अब मै भी देखता हु कोई मक्का मदीना कैसे जाता है?'
और इस बात का इतना असर हुआ की अगले ही दिन अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई...
आज हम ऐसे ही बाला साहेब के जीवन के बारें में पढ़ने -----

bala saheb biography

बाला साहेब का परिचय  ( Introduction)


 नाम - बाल केशव ठाकरे 
जन्म - 23 जनवरी 1926 
पिता - केशव सीताराम  ठाकरे  (प्रबोधनकर )
माता - रमा बाई
कार्य -  कार्टूनिस्ट और राजनीति
पार्टी -  शिव सेना
मृत्यु -  17 नवम्बर 2012

 प्रारम्भिक जीवन परिचय ( Early Life Of Bala Saheb Thackeray )

बाल ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1928 को पुणे में हुआ था .. रमा बाई और केशव सीताराम ठाकरे उनके माता-पिता थे.. बाल ठाकरे के पिताजी सामाजिक कार्यकर्ता थे और उनके ही व्यक्तित्व का प्रभाव बाला साहेब पर भी बहुत पड़ा.. बाला साहेब  उनकी तरह सीधी बात कहते थे और वो जो भी बात कहते थे उसे सीना ठोक कर  कहते थे..

बाला साहेब ने कार्टूनिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.. वे free press journal मुंबई के लिए cartoon बनाते थे..उनके कई कार्टून The Times Of India में भी छपे थे.. बाला साहब अपने कार्टून में बहुत तीखे हमले करते थे.. वे एक बार सोच लेते की आज मुझे उस पर कार्टून बनाना है तो वे उस पर कार्टून बना कर ही दम  लेते थे ...




उसके बाद में बाला साहब ने 1960 में  स्थानीय भाषा में मार्मिक नामक पत्रिका अपने भाई श्रीकांत ठाकरे के साथ मिलकर निकाली..और बाला साहब उसमें तीखे हमले करते कार्टून  छापने लगे.. उन्होंने कझा था कि ' यह पत्रिका उनके परिवार के भरण - पोषण के के लिए है '... और ऐसा सिर्फ वो ही कह सकते थे..


बाला साहेब का निजी जीवन ( Personal Life )
बाला साहब ठाकरे का विवाह मीना ठाकरे ( सरला वाडिया) के साथ 13 जून 1948 को हुआ था.. मीना कुमारी को सभी मीना ताई के नाम से जानते थे.. और मीना ताई ने बाला साहब के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई..

बाला साहब और मीना ताई के तीन पुत्र हुए -  बिंदुमाधव, जयदेव और उद्धव ठाकरे...
बाला साहब के जीवन में 1995 का काल उनपर काल बनकर टुटा.. उनकी जीवन संगिनी का इस वर्ष निधन हो गया और अगले ही वर्ष उनके बड़े बेटे बिंदुमाधव का कार एक्सीडेंट में निधन हो गया ...

बाला साहेब और मराठी मानुस का मुद्दा

           बाला साहब ने मार्मिक पत्रिका के माध्यम से मराठी मानुस का मुद्दा उठाया.. उन्होंने मराठी लोगो के हित में कई कार्टून भी बनाये..

 गुजरातियों और दक्षिण  भारतियों के महाराष्ट्र में व्यवसाय अधिक थे और उसमें मराठी लोगो को नौकरी नहीं मिलती थी..यदि कई मिलती भी तो बड़े बड़े ओहदे नहीं मिलते है...

दक्षिण भारतीय  को वहां से हटाने के लिए एक नारा दिया -"लुंगी हटाओ- पुंगी बजाओ" .. और इस आन्दोलन के तहत वहां पर दक्षिण भारतियों के office में तोड़ फोड़ की और उनके साथ मारपीट भी की गई...

1969 में बाला साहब को गिरफ्तार किया गया ...लेकिन उनके समर्थको ने मुंबई में भयंकर माहौल बना दिया और वहां पर पुलिस भी फ़ैल होने लगी.. तब तत्कालीन मुख्यमंत्री  ने बाला साहब से विनती की और उनसे लोगो से अपील करने के लिए आग्रह किया... जो भीड़ पुलिस और प्रशासन शांत नहीं कर सकी वो भीड़ बाला साहब के एक अपील से शांत हो गई ...
यह सब बाला साहब के रुतबे और उनकी पॉवर का प्रभाव था..

शिव सेना की स्थापना 

  बाला साहब ने 19 जून 1966 में नारियल फोड़ कर शिव सेना की स्थापना की .. और शिव सेना की स्थापना मार्मिक पत्रिका की सफलता से ही प्रेरित हो कर की गई.. जब पार्टी की पहली बैठ बुलाई गई तो उसमे पचास हजार लोगो के बैठने की व्यवस्था की गई लेकिन तब वहां पर करीब दो लाख लोग आये और यहाँ से ही बाल केशव ठाकरे , बाला साहब ठाकरे के नाम से पहचाने जाने लगे...


शिव सेना की जब स्थापना की गई तब यह शांत सगंठन  था और मराठी लोगों के मुद्दे उठाता था.. उससे मराठी लोगो का जुडाव शिव सेना के साथ बढ़ने लगा ... शिव सेना ने 1968 में मुंबई की BMC के  चुनाव में भाग लिया और 40 मेंसे 15 सीटों पर कब्जा जमा लिया..

यहाँ से politics में आई शिव सेना ने 1974 में BMC पर जीत हासिल की और 1985 के बाद BMC पर लगातार जीतती आ रही है...

1989 में मराठी में सामना दैनिक की शुरुआत की गई... और यह अख़बार अपनी तीखी टिप्पणी के लिए जाना जाता है..

शिव सेना ने 1995 में भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिला लिया और विधानसभा पर कब्जा जमा लिया...शिव सेना के मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने..


बाला साहेब के वे कार्य और बयान जो उन्हें खास बनाते है..

  बाला साहब अपने तरीके के अकेले नेता थे वो अपने बेबाक बोलो के लिए जाने जाते थे.. और वे जो भी कहते थे सोच समझकर कहते थे लेकिन एक बार जो बात कह देते थे वो पत्थर की लकीर हो जाती जाती...

  1. 1992 में जब अयोध्या में बाबरी मंजिद को गिराया गया तब सभी लोग ना नुकर करने लगे थे तब आप की अदालत में बाला साहब से सवाल किया गया की- ' क्या मंजिद  गिराने में शिव सैनिकों का हाथ है?'
     तब बाला साहब ने कहा था कि -' यह तो शिव सैनिको और हमारे लिए गौरव की बात है...'यदि अपने आप को बनाये रखना है तो हिन्दुओं को खड़ा होना होगा..'
     
  2. जब इंदिरा गाँधी ने जब 1975 में आपातकाल लगाया था तब बाला साहब ठाकरे  ने इंदिरा जी  के इस कदम का समर्थन किया था...
     
  3. बाला साहेब हिटलर और श्रीलंका के सगंठन लिट्टे के मुरीद थे..
     
  4. 2007 के राष्ट्रपति के चुनाव में जब NDA ने भैरू सिंह जी का समर्थन किया था तब बाला साहब ने श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का समर्थन किया था...  क्योंकि प्रतिभा पाटिल मराठी थी..
     
  5. एक बार बाला साहब ने मुसलमानों को कैंसर तक कह दिया था..
     
  6. बाला साहब में एक ख़ास बात थी कि वे किसी से मिलने नहीं जाते थे जिसको मिलना होता था वो मातुश्री में आता था...
     
  7. बाला साहब ने वीपी सिंह द्वारा लाए गये मंडल कमिशन का विरोध किया था.. और इसी कारण उनके एक साथी छगन भुजबल ने शिव सेना से खुद को अलग कर लिया था...


बाला साहेब पर वोट देने का प्रतिबंध

  बाला साहब के जीवन में कई उतार-चढाव आये.. वे अपने विवादित बोलो के कारण हमेशा चर्चा में रहते थे.. और कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा था..

एक बार बाला साहब पर चुनाव में वोट डालने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था... बात है सन 1999 की .. जब चुनाव आयोग ने बाला साहब को  मत डालने के अधिकार से वंचित कर दिया था... चुनाव आयोग ने 28 जुलाई 1999 को बाला साहब के voting rights पर 6 साल के लिए  banned लगा दिया था.  इस कारण वे 11/12/1999 से 10/12/2005 तक उन के मत डालने पर रोक लगी रही...
बाला साहब ने एक बार भी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उनका रुतबा महाराष्ट्र में CM से कम नहीं था...उनकी एक आवाज पर हमेशा चलने वाली मुंबई बंद हो जाती थी.. उनका प्रभाव ऐसा था  की उनके विरोधी भी उनसे मिलने आते थे..

बाला साहेब ठाकरे की मृत्यु

    बाला साहब अपने जीवन के अंतिम दिनों में बहुत कमजोर हो गये थे... और वे अधिकतर समय अपने निवास मातुश्री में ही रहते थे.. बाला साहब हमेशा  दशहरा पर भाषण देते थे लेकिन  2012 के दशहरे के मौके पर हमेशा अंगारों की भाषा बोलने वाला भाषण देने नहीं आया और घर से ही video live के माध्यम से भाषण दिया था...

और लाखों दिलों की धडकन , हजारों लोगो के आदर्श और हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहब ठाकरे ने 17 नवम्बर 2012 को अंतिम साँस ली...  बाला साहब के निधन की खबर से हमेशा चलने वाली मुंबई अपने आप बंद हो गई थी..


लाखों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और करोड़ों लोगों ने टीवी के माध्यम से लाइव देखा था....
बाला साहेब को 21 तोपों की सलामी दी गई जबकि वे न तो राष्ट्रपति थे और न ही प्रधानमन्त्री .... ये सब बाला साहब का रुतबा और उनका प्रभाव था....

बाला साहब का अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में किया गया... और एक बब्बर शेर पंच तत्वों में विलीन हो गया...बाला साहब के साथ ही एक युग का अंत हो गया...





बाला साहब की जीवनी आपको कैसी लगी? आप कमेंट्स  करके जरुर बताएं और यदि अच्छी लगे तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.....

NOTE - यदि आपको हमारी इस post में कोई गलती नजर आती है तो हमे जरुर बताएं और यदि आपके पास बाला साहब से जुडी कोई जानकारी हो तो हमारे साथ जरुर शेयर करे....

ये मंजिल कैसे मिलेगी? Best motivational poem in hindi

युवाओ के लिए प्रेरणादायी कविता

ये मंजिल कैसे मिलेगी?

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ये मंद मंद गति क्यों?
ये अलसाई सी अंगड़ाई क्यों?
किसकी आस में तुम बैठे हो,
राह किसकी तुम देखते हो।

क्यों हवा में महल बनाते हो?
क्यों सपनों मे ही खोते हो?
हाथ मलोगे, जब   सुबह होगी,
क्यों जीवन ऐसे गंवाते हो?

शल्य बने बैठे है जग में,
रथ धंसा देंगे जमीं में।
बना निहत्था तुझे,
मस्तक कौन्तेय से कटवा देंगे।

जब बाण चढ़े थे गांडीव पर,
तब हक पांडवो को मिला था।
बढा हाथ जब धनु को,
तब सिन्धु कदमों  में पड़ा था।

न पाँव जमीं पर न हाथ धनुष पर,
ये विजय तुम्हे कैसे मिलेगी?
मांगे न भीख मिलती,
ये मंजिल तुम्हे कैसे मिलेगी?

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विरम सिंह सुरावा


ओर कविताएँ 



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ख़ुशी, जोश, उमंग और उजाले के त्योहार दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई... आप सभी अपने जीवन में दिन दुगुनी रात चौगुनी वृदि करे.. आपका जीवन सुखमय और मंगलमय हो ... आज इस दिवाली के पावन पर्व के मौके पर gyandrashta.com की तरफ से सभी पाठको के लिए परमपिता परमेश्वर से यही प्रार्थना है... 

दीपावली पर निबंध | Essay On Deepawali In Hindi 2018


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सभी पाठकों को दीपों के त्यौहार दीपवाली की हार्दिक बधाई... आपका जीवन खुशियों से भरा रहे, सुख-समृद्धि आपके द्वार रहे......
 
दोस्तो हमारा देश पर्व और त्योहारों का देश है । यहा पर Everyday कोई न कोई Festival जरूर Celebrate किया जाता है।
Friends Festival हमारे मन मे उमंग और उत्साह का संचार करते है। India मे हिन्दू हो या मुसलमान या जैन सभी धर्म के उत्सव हर्षोल्लास से मनाते है ।
होली, दीपावली, रक्षाबंधन, आखातीज, करवा चौथ, कजली तीज, जन्माष्टमी, गणगौर आदि हिन्दुओ के प्रमुख त्योहार है । इनके अलावा भी बहुत से Festival Celebrate किए जाते है ।
दीपावली हिन्दुओ की Most festival है । आज हम दीपावली पर सम्पूर्ण जानकारी देगे।

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दीपावली पर निबंध 

     In This Post
1. दीपावली क्यों मनाई जाती है? Diwali Kyo Manate Ha?
2. दीपावली कब मनाई जाती है? When Diwali Celebrate?
3. दीपावली कैसे मानते है? How To Celebrate Diwali?
4. दीपावली का महत्व।


1. दीपावली क्यों मनाई जाती है? Diwali Kyo Manate Hai?

      Friends कई लोगो के मन मे questions होगा कि दिवाली क्यों मनाई जाती है ? तो आपके सवाल का जवाब अब मिल जाएगा।
दिवाली मनाने के पीछे एक बहुत बडा कारण है ।
दिवाली क्यों मनाते है?
      रामायण काल की बात है । जब प्रभु श्रीराम लंका नरेश रावण का वध करके और 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके जब अयोध्या वापिस लौटे थे तब अयोध्या वासियों से खुशी से पुरे अयोध्या नगर को दीपक से सजा दिया । और चारो दीपक ही दीपक थे और उनका प्रकाश से पुरा नगर जगमगा गया। इस कारण हम इस को दीपावली या दिवाली कहते है।

   भगवान श्रीराम के पिता के दिए वचन निभाने के लिए 14 वर्ष का वन मे व्यतीत किए वो हमारे सामने पितृभक्ति का अनूठा उदाहरण है । श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी मे हि दीपावली ( Deepawali ) का त्योहार मनाया जाता है।

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दीपावली कब मनाई जाती है?

      Friends Diwali Festival प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है । कहा जाता है कि जब भगवान अयोध्या पधारे थे, तब अमावस्या थी और दीपकों की रोशनी से अमावस्या की रात्रि को पूर्णिमा की रात्रि बना दिया ।
विशेष :- दोस्तो इस बार की दीपावली  कार्तिक मास की अमावस्या दिनांक 7 नवंबर , 2018  को मनाई जाएगी ।

दीपावली कैसे मनाते है?

     दिवाली को बड़े ही शानदार तरीके से Celebrate किया जाता है।  दिवाली की रात्रि ( अमावस्या की रात्रि ) को सभी लोग अपने घरो को दीपकों की रोशनी से सजाते है। 
युवा इस दिन पटाखे उर आतिशबाजी करके श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी मनाते है। इस दिन विशेष पूजा पाठ भी किया जाता है।



दीपावली का महत्व

      Friends दिवाली का पर्व अपने आप मे एक प्रेरणादायी त्यौहार है । जब दीपक की रोशनी से सारा आसमान जगमगाता है तो मन मे एक नवीन प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है जो की Body और Mind दोनो के लिए Useful होती है।
दिवाली के दिन सभी भाई लोग आपस मे मिलते है जिससे भाईचारा बढता है ।
दीपावली धर्म पर चलने का तथा अपने वचन को निभाने का हौसला बुलंद करती है ।

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दीपावली पर मनाए जाने वाले त्यौहार


      दोस्तो Diwali तो कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है । लेकिन इससे Related ओर भी त्यौहार मनाए जाते है - 

  नवरात्रा
          दिवाली से 20 दिन पहले अश्विन शुक्ल पक्ष एकम् से नवम तक देवी के नौ रूपो की पूजा की जाती है। 

   विजयादशमी
          अश्विन शुक्ल पक्ष दसम् को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है । इस दिन श्रीराम ने रावण का वध किया था इसलिए इस दिन रावण, कुम्भकर्ण और इन्द्रजीत के पुतले जलाए जाते है । 

    धनतेरस
        इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है । यह त्यौहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की 13  को मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है ।

     रूप चतुर्दशी
   यह त्यौहार दिवाली से एक दिन पहले कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की 14 को मनाया जाता है। इस को छोटी दीपावली भी कहते है ।
इस दिन स्त्रियाँ सुबह जल्दी उठकर स्नान करती है और सुन्दर रूप की कामना करती है ।

 गोवर्धन पूजा
   जब इन्द्र देव ने गोकुलवासियों से नाराज होकर उन्हे सबक सीखाने के लिए जोरदार बारिश की तब श्री कृष्ण ने अपनी एक अगुंली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर गोकुल के लोगो की रक्षा की थी । इसलिए इस दिन को गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।
यह पूजा कार्तिक शुक्ला एकम् को की जाती है । 


    भैयादूज
         भाई - बहन का त्यौहारी भैयादूज कार्तिक शुक्ला द्वितीया को मनाया जाता है ।
   
    
दोस्तो आपको हमारा यह " दीपावली पर निबंध " Post कैसी लगी । यदि आपके पास भी दीपावली से जुडी कोई कहानी हो तो हमारे साथ comments box मे जरूर share करे ।


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यादें 35 नंबर की .... best hindi emotional story

Heart Touching Story  in hindi



लम्बे वक्त तक साथ रहने के बाद एकाएक बिछुड़ना कठिन होता है.. मन को समझान पड़ता है.. जिस जगह पर रहे है उसका हर कोना कुछ न कुछ याद दिला जाता है ... मैने भी 3 घंटे अकेले ऐसे ही सवाल पूछते कमरे में बिताये.... इस से अधिक मैं वहाँ रुक न सका... 

heart touching story

Yaden Room  Number 35 Ki


याद जब आती है तो मेलें में अकेला कर जाती है, हजारों के पास होने पर भी किसी के न होने का अहसास दिला जाती है.. जिस स्थान से जो यादें जुडी होती है वो जगह हर क्षण गुजरे कल के उन पलों की याद दिलाती है.. उनसे जुडी हर वस्तु उनके पास न होने पर भी पास होने का अहसास दिला अकेलापन महसूस करा देती है...

 ऐसी ही कुछ यादें जुडी हुई है 35 नंबर के साथ... वैसे 35 नंबर न कोई lucky नंबर है और न ही किसी महबूबा के मकान का नंबर है .. उदयपुर में फतेहसागर झील जहाँ कितने ही  मजनूं अपनी लैला की तलाश में शाम के समय भँवरे की भांति मंडराते है .. किसी को तो कली मिल जाती है तो किसी को मुरझाएं हुए फूल से ही संतोष करना पड़ता है...

उसी झील से थोड़े से फासले पर स्थित विद्या भवन के जुबली हॉस्टल के प्रथम तले का कमरा, जिसे सब रूम नंबर 35 के नाम से जानते है. कॉलेज जीवन के सबसे यादगार पल हॉस्टल के ही होते है और ऐसी ही कुछ यादें इस कमरे के साथ जुडी हुई है...

पिछले दो बसंत से यह कमरा अपने बाशिंदों की चहलपहल से आबाद रहा..वैसे तो इस कमरे पहले भी कई मुसाफिर रह चुके है परन्तु हम जैसा कोई राहगीर नहीं मिला होगा...


मिलकर किसी को रुलाना, फिर रोते को हंसाना;
हो चाहें ख़ुशी या गम हर पल को साथ में जीना...


यही विशेषताएँ यहाँ के बाशिंदों को ओरों से अलग करती थी....

कॉलेज खत्म होने के बाद सब साथी अपने अपने गाँव की ओर प्रस्थान कर चुके थे.. लेकिन मैं पहले ही यहाँ रहने का निश्चिय कर चूका था मगर मुझे अपना निश्चिय इतना जल्दी बदलना पड़ेगा, मुझे भी पता नहीं था.. वैसे भी भविष्य को किसने देखा है जब होता है तब ही पता लगता है की क्या होने वाला था, और कभी कभी तो होने के बाद ही पता चलता है...

सभी को विदा करने के बाद पीछे रह गये थे मै और 35 नंबर वाला कमरा...जो अपने में २ बसंत की यादों को समेटे किसी के होने का अहसास दिलाता था...सभी को विदा  करने के बाद कमरे में आकर लेट गया और अपने में ही खो गया... तभी लगा कोई बरामदे में टहलते हुए जोर जोर से गा रहा है-

"बन्ना थारे धुंधलियाँ धोरां में
  म्हारी चलती मोटर थाकी....."


गीत के बोल रिपीट हो रहे थे और आवाज तेज हो रही थी...उसने गाना बंद किया और कहने लगा -'बाबु....ऐ बाबु... बाबु.....उठ जा बाबु... '

'जसवीरसा!' मैने जोर से पुकारा, सामने से कोई जवाब नहीं आया...

अपने आप को सम्भालते हुए उठ बैठा और अपने आसपास देखा तो पाया की कमरे में तो अकेला ही हूँ ऊपर छत पर लगा पंखा धीमी गति से घूम रहा था और मच्छर भिनभिना रहे थे..खिड़कियाँ बंद थी और कुर्सियां किसी के बैठने के इंतजार में पलक पावड़े बिछाए खड़ी थी...

अभी उठ कर अंगड़ाई ही ली थी कि लगा कोई कह रहा है-'जरा धीरे से, आवाज मत करों, जसवीरसा पढ़ रहे है... पलट कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था..

दरवाज़ा, खिड़कियाँ, टेबल, कुर्सियाँ सबको देख ऐसा लग रहा थी की यह कुछ कहना चाहते है... जब हम अकेले होते है तो हवाएँ भी बातें करती है, खिड़कियाँ किसी की याद दिलाती है, पंखा भी बतियाता है बस जरूरत होती है तो सुनने वाले की .... आज  अकेला था  मुझे भी किसी की जरूरत थी और उन्हें भी किसी की जरूरत थी...


इस बात को समझते हुए दरवाजे के पास वाली टेबल बतियाने लगी -'  मुसाफिर! कहाँ गये तेरे वो हमराही....? कहाँ गया वो आशिक दीवाना...? जिसके हाथो के प्रहारों  को मैने कई बार झेले है...जब वो रात रात भर जागता
था तब मैने उसे अपनी गोद में सुलाया है... बताओं कहाँ गया वो...?

पर मैं चुप था....

बिना उत्तर की प्रतीक्षा किए उसने पुछना जारी  रखा ....'सब के सुख दुःख का साथी; सैकड़ों दिलों का राजा... अपने अंदर रहस्यों का समन्दर रखने वाला वो बाशिंदा कहाँ गया,,,?'

'किसी को हंसाने से पहले खुद ही हंस जाता, जब हंसता तो खुद को ही नहीं सम्भाल पाता.... हँसना - हँसाना ही उसका काम था वो गोल-मटोल , जोली कहाँ गया?'

लेकिन मैं फिर भी चुप था.... बोलकर क्या बताता की अब तेरे बाशिंदे नये ठिकाने पर चले गये है तो उसे कितना दुःख होता,,,,,

लेकिन वे अब भी कातर दृष्टि से मुझे देख रहे थे जैसे अब मेरे होठ खुलंगे और जवाब देंगे... पर मै तो खुद ही अकेला था... क्या करता... जब उनकी दृष्टि मुझ पर से नहीं  हटी तो मैने अपनी आँखे बंद कर ली...

परन्तु जिस प्रकार पानी देखने से प्यास नहीं बूझ सकती उसी प्रकार आँखे बंद कर लेने से सामने जलती आग नहीं बूझ सकती... लेकिन ओर करता भी क्या?

जब भी कमरे से ध्यान हटाने की कोशिश करता तो लगता कोई गा रहा है -
:
 "ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना
नही फिर जाना तू अपनी ज़ुबान से
के तेरी नैना है शराब बेईमान से
ओ मतवाली यह दिल क्यूँ तोड़ा
यह तीर काहे छ्चोड़ आ नज़र की कमान से
के मार जायुंगा मैं बस मुस्कान से "

पर आखों के आगे तो सब सुना सुना था न कोई फिरकी वाली थी न ही कोई साथी  था....

तभी सोचा उठ कर कुछ खा लूँ पर याद आया गुड-चने रखने वाला तो अब यहाँ नहीं है फिर भी मन कठोर कर हल्के हाथो से अलमारी को खोला...तो सामने का नज़ारा देख हक्का बक्का रह गया.. अंदर कुछ मच्छर खो-खो खेल रहे थे दोएक ने तो मुझे विपक्षी टीम का समझकर आउट कर दिया... मैने भी उनके खेल में दखल नहीं देते हुए अलमारी को जैसे खोली थी ऐसे ही बंद कर दी....

मन बहलाने के लिए उठ कर बरामदे में आ गया परन्तु यहाँ भी एकांत था.. जो कभी मुझे पसंद था लेकिन आज विष बाण की भांति चुभ रहा था... थोडा टहल कर पुन: कमरे में आ गया...


पंखा अब भी धीमी गति से चल रहा था और मैने भी उसे तेज़ करने की कोशिश नहीं की, पलंग पर बिस्तर आधा समेटा पड़ा था...दिवार वाले हेंगर पर एक आधा  काला आधा सफेद  पेंट लटक रहा था जो अपने पर गिरती पपड़ी से असली रंग के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, पास में ही लटकता मटमैला कमीज जिसमे से झांकते कुछ सफेद बिंदु कमीज के कभी सफ़ेद होने का अहसास दिला रहे थे...
 

इन सब के अलावा कमरे में मैं और अलमारी में वो खो खो खेलते मच्छर थे...

इस अनचाहे एकांत में जो लम्हे याद आ रहे थे वो किसी पत्थर को भी पिघला सकते थे ...लेकिन अब वो सब कहाँ जो हमने साथ में बिताया.....


 रात-रात भर चलती बातें
जाग कर बिताई वो रातें
कभी अपना, कभी उसका हाल सुनाते
कुछ अपनी, कुछ उनकी सुनते-सुनाते
साथ गाते, साथ पीते
हर पल को साथ ही जीते ...
     
उन साथ बिताएं लम्हों की यादे तीर की भांति दिल को चुभ रही है पर नम आंखे हो रही है...
वैसे तो कुछ बसंत का साथ था अपना पर लगता है जैसे युगों युगों के हमराही आज बिछुड़ गये हो...
अब 35 नंबर की प्रत्येक वस्तु सवाल कर रही है... बीते पलों को याद दिला रही है... इन सब के बीच अकेले रहना बहुत मुश्किल हो रहा है इसलिए अपने निश्चिय को बदलकर रूम नंबर  35 को अलविदा कह रहा हूँ...

 यह कमरा अब अकेला हो जायेगा और इंतजार करेगा अपने नये बाशिंदों का ताकि उन्हें वो अपने  सिरफिरे, अलबेले बाशिंदों की कहानी सुना सके.... अपना दर्द बयाँ कर सके....


viram singh story

विरम सिंह देवड़ा 


वनशाला शिविर के अनुभव
माँ का ख़त बेटे के नाम
महिलाओं पर कविता

सरदार पटेल के जीवन के 2 प्रेरक प्रसंग | 2 motivational story in hindi



सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौहपुरुष के नाम से जाना जाता है. सरदार पटेल का पूरा जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाईयों का सामना किया और उन पर विजय प्राप्त की इसलिए तो इन्हें लौह पुरुष कहा जाता है.

sardar vallabhai patel 2 motivational story in hindi



sardar patel biography


प्रेरक प्रसंग #1

 sardar vallabhai patel के पिताजी किसान थे और सरदार पटेल जब छोटे थे तब वे अपने पिताजी के साथ खेत पर जाते थे. एक दिन सरदार पटेल के पिताजी खेत में हल चला रहे थे और सरदार पटेल उनके साथ साथ चलते हुए पहाड़े याद कर रहे थे. वे याद करने में पूरी तरह से तन्मय हो गये और हल के पीछे चलते चलते उनके पांव में कांटा लग गया परन्तु सरदार पटेल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा तथा वे उसी तन्मयता से पहाड़े याद कर रहे थे. तभी अचानक उनके पिताजी की नजर वल्लभ भाई के पांव पर पड़ी तो पांव में बड़ा सा कांटा देखकर एक दम से चौक गये. और तुरंत बैलों को रोककर वल्लभ के पैर से कांटा निकाला और घाव पर पत्ते लगाकर खून को बहने से रोका.
      सरदार पटेल की इस तरह की एकाग्रता और तन्मयता देखकर उनके पिताजी बहुत खुश हुए और उन्हें जीवन में कुछ बड़ा करने का आशीर्वाद दिया. और उनके इस आशीर्वाद को सरदार पटेल ने बखूबी सफल किया.

शिक्षा
   दोस्तों जब भी हम कोई कार्य करते है तो हमारा ध्यान पूरी तरह से उस काम में होना चाहिए तभी हम सक्सेस हो सकते है. और हमारी लाइफ में इस तरह के संकट (कांटे) बहुत आते है बस आपको अपने काम पर लगे रहना है.

प्रेरक प्रसंग #2 

 

sardar-patel

 



      सरदार पटेल की सहनशीलता


सरदार पटेल ने 1990 में तीन वर्षीय जिला मुख्तारी का कोर्स करने के बाद वे पैसे कमाने के लिए अपने मित्र कशीभाई के पास आ गये और अपनी योजना को कार्यरूप देने लग गये. 
    जब पटेल अपने मित्र के पास रह रहे थे तब उनकी कांख में फोड़ा हो गया. बहुत इलाज करवाया, लेकिन फोड़ा ठीक नहीं हुआ. इसलिए यह निश्चित किया गया की फोड़े में चीरा लगवाया जाए. चीरा लगवाने के लिए वे एक नाई के पास गये. नाई ने चीरा लगाने की बजाय गर्म सलाखों से जलाना ठीक बताया और इसलिए सलाखे गर्म की गई लेकिन नाई फोड़े को जलाने से घबराने लगा. सरदार पटेल ने उसकी बात को समझ लिया और स्वयं ने ही गर्म सलाखों से फोड़े को जला दिया. यह देख कर नाई घबरा गया और देखने वाले भी वल्लभ की इतनी सहनशक्ति देखकर हैरान रह गये.

 शिक्षा-
    यदि आपको अपनी लाइफ में सक्सेस होना है तो आपमें सहन शक्ति बहुत आवश्यक है. परेशानी रूपी फोड़े को स्वयम ही जलाना होगा अर्थात संकट का स्वयम ही निस्तारण करना होगा दूसरा कोई नहीं करने वाला.



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Dr APJ Abdul Kalam thoughts in hindi | एपीजे अब्दुल कलाम से हम क्या सीखे?

 

 

  एपीजे अब्दुल कलाम के विचार  APJ Abdul Kalam in hindi


 dr. APJ Abdul kalam केवल एक नाम ही नहीं बल्कि एक ऐसा व्यक्तित्व है जो हर इंसान को पल - पल और कदम - कदम पर निरंतर आगे बढ़ने का हौसला देता है.

कलाम साहब बच्चो और युवाओं में काफी लोकप्रिय रहे और कई लोगो के ideal भी है. कलाम साहब का सम्पूर्ण जीवन यात्रा  अद्भुत है. अख़बार बेचने से लेकर भारत के राष्ट्रपति बनने का सफर वाकई अद्भुत है. कलाम साहब युवाओं को देश का भविष्य मानते थे और उनका कहना था की यही है जो भारत को एक नई दिशा देंगे. dr APJ Abdul Kalam को missile man के नाम से भी जाने जाते...

apj abdul kalam


कलाम साहब को public president के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वे जनता में बहुत लोकप्रिय रहे. जब वे राष्ट्रपति बने तो उन्होंने राजभवन को जनता से जोड़ने का प्रयास किया. कलाम का जीवन students के लिए काफी प्रेरणादायी है और उनसे सीख कर नई ऊंचाई प्राप्त कर सकते है.

APJ Abdul Kalam Quotes on students, teachers, hard word, dreams in hindi 


एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 october 1931 को रामेश्वरम में हुआ था. कलाम ने अपने बचपन में कई प्रकार की चुनोतियों का सामना करते हुए अपने मुकाम तक पहुंचे थे. कलाम का जीवन एक मिशन था वे हर समय कुछ नया  सिखने का प्रयास करते थे.  डॉ कलाम ने अपनी किताबों और कोट्स में युवाओं के लिए बहुत motivational बातें लिखी है, यदि हम उनकी बातों को अपने जीवन में उतारे तो अवश्य ही success हो सकते है...


इंतजार पर एपीजे अब्दुल कलाम के विचार 

हम लोगो में से बहुत से लोगो की समस्या होती है की हम इंतजार करते रहते है की कभी मौका आएगा तब हम सक्सेस हो जाएँगे और इसी सोच में बेठे रहते है लेकिन कलाम साहब कहते है की -"इंतजार करने वालों को उतना ही मिलता है जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते है." यह सच भी है की यदि हम बैठे रहते है तो हमे उतना ही मिलता है जितना आगे चलने वाले छोड़ जाते है.. इसलिए केवल बेठे कर सपने देखने से कुछ नहीं होता बल्कि उसके लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए तब सफलता मिलती है...

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सपनो पर कलाम के विचार 

सपनों को लेकर भी कलाम साहब ने बहुत शानदार बात कही है कि -" सपने वे नहीं होते जो सोते हुए देखते है, सपने तो वे होते है जो सोने ही नहीं देते."  अर्थात बस ख्यालों  में ही खोए रहे की ऐसा हो जाए वैसा हो जाए तो जिन्दगी ख्यालों में ही गुजर जाती है.. यदि सक्सेस होना है तो खुली आँखों से सपने देखो ओअर उसे पूरा करने के लिए नींद को भी त्याग दो तो आप एक दिन अवश्य success होंगे.



सपनों से जुडी हुई एक और बात अब्दुल कलाम ने कही है की -"महान सपने देखने वालों के महान सपने अवश्य पुरे होते है." हम क्या करते है की सपने ही छोटे देखते है जिससे हमे मिलता भी थोडा  है.. यदि हमे चन्द्रमा तक जाना है तो सूर्य तक जाने का सपना देखना चाहिए क्योंकि यदि सूर्य तक नहीं जा पाए तो कोई बात नहीं चन्द्रमा तक तो पहुँच ही जायेंगे...

मेहनत पर अब्दुल कलाम के विचार

 जितने भी बड़े और सक्सेस लोग हुए है सब ने सफलता की कुंजी मेहनत को ही बताया है. यही बात कलाम साहब ने भी कही है.. वे हमेशा बच्चो और युवाओं को कड़ी मेहनत करने की सलाह देते रहे है. उन्होंने कहा है कि -"यदि सूरज की तरह चमकना है तो पहले सूरज की जलना सीखो." 

 हम किसी सफल व्यक्ति को देखकर उसके जैसा बनने की सोचते है पर यह कभी नहीं देखते की उसने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कितने पापड़ बेले है. इसलिए यदि हमे सफल होकर दुनिया में चमकने है तो सूरज की भांति तपना होगा...

क्योंकि "शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है फिर चाहे वो माउंट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का." APJ Kalaam

apj kalam life


भष्टाचार पर कलाम साहब के विचार

डॉ अब्दुल कलाम खुद सादगी भरा जीवन जीते थे वे प्रेसिडेंट बने तब भी उन्होंने अपनी जीवन शैली को नहीं बदला.. वे कहते थे कि - " यदि देश को भष्टाचार से मुक्त और सुंदर राष्ट्र बनाना है तो इसमें तीन लोगो ऐसा कर सकते है - माँ, पिता और शिक्षक."

एक व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव उसके माता-पिता और गुरु का पड़ता है और वे ही उसे एक सही राह द्दिखा सकते है...


कठिनाई पर एपीजे कलाम के विचार

हम अपने जीवन के मार्ग में जब भी कोई कठिनाई देखते है तो लक्ष्य से विचलित हो जाते है या उस लक्ष्य को ही छोड़ देते है. हम मेंसे बहुत से लोग कठिनाई से डॉ जाते है जबकि कलाम साहब का मानना था कि -" इन्सान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है क्योंकि सफलता का आनन्द उठाने के लिए यह जरुरी है."

जो चीज हमे आसानी से मिल जाए उसके लिए हमे उतनी ख़ुशी नहीं होती है जितनी मुश्किल से लड़ कर प्राप्त की गई चीजों में होती है..
और वो ये भी कहते थे कि -"जब हम मुश्किल हालात का सामना करते है , तो हम अपने साहस और ताकत के छिपे हुए भंडार को खोज पाते है.."

 

लक्ष्य पर APJ Abdul kalam के विचार
  
अपने कार्य में सफलता को लेकर कलाम साहब कहते है की "यदि आपको अपने मिशन में कामयाब होना है तो लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा. " यह जरुरी भी है क्योंकि यदि हम अपने लक्ष्य बदलते रहेंगे तो सफलता के कोई चांस नहीं है जैसे अलग अलग जगह 10 कुएँ खोदने की बजाय एक जगह ही खोदे तो पानी निकलने की अधिक सम्भावना होती है...

 

बच्चों के लिए कलाम के विचार

 कलाम को स्टूडेंट्स बहुत पसंद थे वे हमेशा students के साथ रहना पसंद करते थे. वे बच्चों से कहा करते थे की आप इन चार बातों को अपने से रोज बोले-
  1. मैं सबसे अच्छा हूँ...
  2. में यह काम कर सकता हूँ...
  3. चैम्पियन था और हूँ...
  4. आज का दिन मेरा है..


और कलाम साहब के एक बहुत सुंदर कोट्स है कि -" किसी को हराना आसान है परन्तु किसी को जितना बहुत मुश्किल है.."

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What is S-400 missile system ? S-400 मिसाइल्स क्या है और भारत को इसकी जरूरत क्यों है?


 S-400 missile system क्या है? इसकी क्षमता और कीमत कितनी है? भारत को इसकी जरुरत क्यों है? सभी जानकारी हिंदी में



S-400 Triump missile Defense system russian company के द्वारा बनाया गया ताकतवर defense सिस्टम है, इसकी कार्यक्षमता का लोहा NATO और United State भी मानते है.
5 October 2018 को भारत और रूस के बिच इस मिसाइल डिफेन्स सिस्टम को लेकर डील हुई है जिससे भारत की वायुसेना को और ताकत मिलेगी.
s-400 missile system



दोस्तों Indian Air-force Chief कई बार कह चुके है की हमारे पास एयरक्राफ्ट की कमी है और यदि दो मोर्चो ( पाकिस्तान व चीन) पर एक साथ युद्ध लड़ना पड़ा तो हमारे लिए मुश्किल हो सकती है. इसलिए भारत को एक ऐसे सिस्टम की आवश्यकता थी जो इस कमी को पूरी कर सके.

आज इस पोस्ट हम हम जानेगे की S-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम क्या है? , S-400 की खासियत क्या है?, भारत को इसकी आवश्यकता क्यों है? इस डिफेन्स सिस्टम की क्षमता और कीमत कितनी  है? आदि points को हम इस post में clear करेंगे ....

S-400 Missile Defense System क्या है?

   S-400 को russia कि Almaz Antey नामक कंपनी ने बनाया है. इस को NATO ने SA-21 Growler नाम दिया है. यह Modern Long Range Surface To Air Missile System है.
S-300 को upgrade करकें S-400 को बनाया गया है. इसका रूस ने पहली बार उपयोग 2007 में किया था. यह system दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही मिटाने की क्षमता रखता है.

S-400 क्या कर सकता है?

   S-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम aircraft, ballistic और cruise मिसाइल्स को आसानी से Target कर सकता है.
यह डिफेन्स सिस्टम 400km की रेंज में आने वाले टारगेट को हवा में खत्म क्र सकती है.

S-400 की क्षमता कितनी है?
  यह एक ताकतवर मिसाइल डिफेन्स सिस्टम है. इसकी ताकत के आगे कई मिसाइल्स पानी भरती है.

  1. यह ताकतवर रक्षा कवच देता है. 
  2. s-400, 400km की range में आने वाले टारगेट को 17 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की speed से हिट कर उसे राख बना सकता है.
  3. यह एक साथ 36 परमाणु missiles को खत्म कर सकता है.
  4. यहं अमेरिका के ताकतवर लड़ाकू विमान F-35 को भी गिरा सकता है.
  5. यह system बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल को नष्ट कर सकता है.
  6. S-400 5 से 10 मिनट में वापिस install होकर ready हो जाता है.
  7. s-४०० का आवागमन भी आसानी से किया जा सकता है.

अपनी इन विशेषताओं के कारण ही दुनिया S-400 का लोहा मानती है. और हर कोई देश अपने रक्षा कवच में शामिल करना चाहता है.
चीन ने भी रूस से इसकी 6 battalion ली है और अब भारत ने भी 5 battalion की डील पर sign किये है.

भारत को S-400 की जरूरत क्यों है?
 
    वैसे तो India शांति में विश्वास रखता है पर दो पड़ोसी देशों की वजह से रक्षा कवच को बढाने की जरूरत है. चीन ने कुछ समय पहले यह सिस्टम लिया है और उसके पास काफी एयरक्राफ्ट है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के पास भी चीन व अमेरिका के दिए हुए aircraft है.
इन दोनों से निपटने के लिए भारत को अपनी हवाई ताकत बढ़ने की जरूरत है. और इसका अच्छा solution S-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम है..



आइए अब भारत,चीन और पाकिस्तान की एयरफोर्स की ताकत को देखते है.

चीन की हवाई ताकत
       china के पास 1700 Fighters है और इसमें 800 4th generation के Fighter है.
चाइना ने रूस से s-400 की 6 battalion ली है.


पाकिस्तान की हवाई ताकत
        पाक के पास 20 Fighter Squadrons है जिसमे upgraded F-16s और J-17 भी शामिल है.
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भारत की हवाई ताकत
     भारत के पास 14 स्क्वाड्रन है जिसमे मिग 21 व मिग 27 है और भारत के पास 100 सुखोई है परन्तु एक समय 35 ही उपलब्ध हो पाते है.

दोनों मोर्चों पर लड़ने के लिए भारत को एक मिसाइल डिफेन्स सिस्टम की जरूरत थी और S-400 इसके लिए उपयुक्त विकल्प है इसी कारण भारत ने russia के साथ Deal करके 40 हजार करोड़ में S-400 की 5 battalion खरीदी है.

भारत - रूस की इस डील पर अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत पर CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाने की बात की  है लेकिन बिना दबाव में आये भारत ने रूस से यह समझौता कर लिया है.


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