दो मेंढक Best Hindi Motivational Story

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एक Time मेंढकों का एक Group जंगल के रास्ते  तालाब की ओर जा रहा था । सभी मेंढक अपनी मस्ती मे चल रहे थे । तभी अचानक दो मेंढक एक गड्ढे में गिर गये ।
गड्ढा  थोड़ा गहरा था । जब अन्य मेंढकों ने देखा कि गड्ढा बहुत गहरा है तो उन्होंने दोनो मेंढकों से कहा कि यहा से बाहर निकलना मुश्किल है ।



लेकिन दोनो मेंढक उन के comments को  नजरअंदाज करते हुए बाहर आने की कोशिश करने लगे ।
लेकिन बाहर खड़े मेंढक उन्हे लगातार यह कह रहे थे कि तुम यहा से बाहर नही निकल सकते ।
आधे रास्ते मे अटके हुए दोनो मेंढकों मे से एक ने बाहर खड़े मेंढकों की बातो पर ध्यान दिया ओर उसने अपनी पकड़ छोड़ दी और वह निचे गिर कर मर गया ।

दूसरा मेंढक सभी की बातो को अनसुनी करते हुए लगातार कोशिश करता रहा । अन्त में बड़ी मुश्किल से वो उस गहरे गड्ढे से बाहर आने में सफल हो गया ।

जब वो बाहर आया तो अन्य मेंढकों ने पूछा कि " क्या तुमने हमारी बाते नही सुनी ?"
मेंढक ने Explained करते हुए कहा कि " वह बहरा है उसे दूर से सुनाई नही देता ।"
इसलिए वह मेंढक सोचता रहा कि यह सब साथी उसको प्रोत्साहित कर रहे है क्योंकि उसको सुनाई तो देता नही था ।

शिक्षा -  जीभ मे जीवन और मौत की शक्ति है ।
  एक शब्द किसी को नीचे से ऊपर उठा सकता है और ऊपर से नीचे ला सकता है । इसलिए जो भी कहे सोच समझ कर कहे ।
Motivational words किसी की life को successful बना सकते है ।

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मै और मैना का रहस्य


किताबे पढ़ने के 5 कारण ..... Books Reading Benifits


   किताब पढ़ने के कारण और फायदे

5 reason


आपने कई लोगो को देखा होगा जो अपने Busy schedule मे से भी  Time निकाल कर Books पढते है । क्या आप ने  सोचा है वो ऐसा क्यो करते है ? क्या उन्हे किताबो के पृष्ठ आकर्षित करते है ? इनके सब सब बातो का अनुमान तब तक आप नही लगा सकते जब तक आपने कोई अच्छी किताब पढी न हो ।

आज इस पोस्ट मे ऐसे कारण Reason की बात करेंगे जिस लिए Books पढनी चाहिए ।

1 विश्वसनीय जानकारी
        आज कुछ भी जानकारी प्राप्त करने के लिए हम Google Baba के पास जाते है । और हमे वहाँ से सभी Information मिल जाती है। लेकिन इसकी कोई गारंटी नही की वो जानकारी सही हो , क्योंकि Google पर जो जानकारी मिलती है वो किसी के लिखे हुए Blog से मिलती है । जो सही भी हो सकती है और गलत भी ।
Books को  प्रकाशक द्वारा सभी जानकारी सत्यता और प्रमाणिकता की कसौटी पर खरी उतरती है तब उसे प्रकाशित किया जाता है । किताब से मिलने वाली अधिकतम Information सही और विश्वसनीय होती है ।


 2  कल्पनाशक्ति का विकास
         जब हम film देखते है तो हमारी कल्पनाशक्ति का उपयोग नही होता है। film मे सभी पात्र को देख और सुन सकते है । लेकिन Books मे ऐसा नही होता है । Books पढने पर हमारा दिमाग imagine  करता है जिससे imagination power बढता है जो हमारे mind and memory के लिए आवश्यक है ।

3.  नया अनुभव 
          अलग अलग Books पढ़ने से अलग अलग अनुभव मिलते है। जैसे जैसे आप नई पुस्तक पढोगे तो आपको कोई नया अनुभव जरूर मिलेगा । 
 Books से हि कल्पनाशील दुनिया मे रहने का अनुभव प्राप्त कर सकते है इसे शब्दो के द्वारा व्यक्त करना मुश्किल है इसे तो खूद अनुभव करना चाहिए ।

4. प्रतिभाशाली लोग भी Books के दिवाने
      एक बार भारत के Primeminister श्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे रात को सोने से पहले  किताब पढते है ।
स्वामी विवेकानंद जी , अब्राहम लिंकन उर नेल्सन मंडेला जिन्होंने अपने विचारो के दम पर दुनिया बदल दि सभी को अच्छे Books reader के रूप मे जाने जाते है ।

5.  जीवन के उदाहरण
      पुस्तके सबक सिखाने और motivated का अच्छा साधन है ।  अनुभव जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । किताबो मे लेखक अपने जीवन के अनुभव भी लिखता है जो हमारे लिए बहुत काम के होते है । हम उन अनुभव से सीख ले कर life मे आगे बढ सकते है । 
आचार्य चाणक्य ने कहा है कि " यदि खुद के अनुभव से सीख लोगे तो जिन्दगी ऐसे ही निकल जाएगी , कुछ विशेष करना है तो दूसरो के अनुभव से सीख लिजिए ।


पुस्तके एक अच्छे दोस्त की तरह है । यदि आप के पास अच्छी Books है तो आपको किसी और की आवश्यकता नही होगी ।
इसलिए हमेशा अच्छी पुस्तके जरूर पढ़नी चाहिए ।


आपको हमारा यह लेख कैसा लगा comments करने जरूर बताइए । यदि आपके कोई विचार या सवाल है तो comments box मे जरूर रखिए ।


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दोस्तो पर शायरी | friends kaise ho hindi quotes | friendship quotes in hindi


दोस्तो friendships दुनिया मे सबसे शक्तिशाली word है   दोस्ती के लिए लोग अपनी जान की बाजी लगा देते है । श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की मिसाल आज भी लोग देते है ।
Friends आज हम इस post मे कुछ दोहे , shayari, quotes प्रस्तुत कर रहे है जिनके अनुसार दोस्त कैसे हो ? कैसे को दोस्त नही बनाए ? दोस्ती कैसी हो ?

Friendships पर Quotes, Shayari


Friends kaise ho


दोस्त कैसे हो ? Friends kaise ho

"मुख मीठा सज्जन घणा मिल जा मित्र अनेक,
काम पड्यां कायम रहे सो लाखन मे एक ।"

कभी जीवन मे ऐसा वक्त आ जाए कि तुम्हारा कोई भी न बचा हो ऐसे मे जो तुम्हारे काम आ जाए वही वास्तविक मित्र है ।

     "मित्र ऐसा कीजिए, ढाल सरीखो होय ।
   दुख में तो आगे रहे, सुख मै पाछो होय ।।"
अर्थात मित्र ढाल के समान होना चाहिए जो भले ही पीठ पर रहे पर संकट के समय में हमारी रक्षा के लिए आगे होता जाये ।

राजस्थानी साहित्य मे नीतिगत सीख

कैसे मित्र नही करने चाहिए ।( Kaise Friends Nahi Banane Chaie )


     " स्वार्थी और कपटी मित्र से अच्छा है  बिना मित्र के ही रहा जाए ।"

" सिंहन के वन में वसिये, जल में घुसिये, कर में बिछुलीजे ।
कानखजुरे को कान मे डारि के, सांपन के मुख अगुंली दीजे ।।
भूत पिशाचन में रहिये अरू जहर हलाहल घोल के पीजे ।
जो जग चाहै जिओ रघुनन्दन, मुरख मित्र कदे नही कीजे ।।"

सांप, बिच्छु और कानखजुरे उतने खतरनाक नही होते और जहर भी उतना नुकसानदेह नही होता है जैसा मूर्ख मित्र ( friends )।
मूर्ख मित्र की बजाय बुद्धिमान दुश्मन कही ज्यादा अच्छा होता है । इसलिए कहते है -
" सांड के अगाडी से खतरा , गधे के पिछे से खतरा पर मुर्ख मित्र के तो चारो ओर से खतरा है ।

ओशो के अनमोल विचार

friendship कैसी हो ?

       दोस्त हो कृष्ण सुदामा जैसी हो । जिसमे श्री कृष्ण राजा होने के बावजूद सुदामा के चरण धोए और आदर सम्मान देकर एक friend

I am Flowers, My Rose is you.
I am Diamond. My Kohinoor is you.
I am Sky, My Moon is you.
I am River , My Boat is you.
I am just Friend but best Friend is you .


friends आपको हमारी यह post कैसी लगी comments करके जरूर बताय और यदि अच्छी लगे तो अपने दोस्तो के साथ जरूर share करे ।

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय Teacher Day 2018

dr sarvepalli radhakrishnan biography in hindi 


शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई... happy teacher day

  दोस्तों India में  5 september teachers day ले रूप में मनाया जाता है|  हम 5 september को teachers day के रूप में इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन देश के महान अध्यात्मिक राजनेता और india के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन  का जन्म हुआ था और उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस घोषित किया गया है|

 आज हम देश के उस महान व्यक्ति की जीवनी पोस्ट कर रहे है| डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन हमारे लिए प्रेरणादायी और अनुकरण करने योग्य है| 

    
dr sarvepalli radhakrishnan


Early life and Education 

                   डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 september, 1888 को तमिलनाडू के तिरुतनी नामक गाँव में हुआ था| उनकी family धार्मिक विचारों वाली थी और इसका प्रभाव भी उन पर बहुत पड़ा| 
उन्होंने अपनी primary और माध्यमिक शिक्षा तिरुपति के मिशन स्कूल तथा बेलौर कॉलेज से हासिल की थी|  dr radhakrishnn ने 1905 में मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश लिया और यही से बी.ए और एम.ए की डिग्री प्राप्त की थी|

 डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन को संस्कृति और कला से बहुत लगाव था और वे सभी धर्मो का आदर करते थे| वे मानवता के पुजारी थे उनका कहना है - " ,मानव का दांव बनना उसकी हर है, मानव का मानव बनना उसकी जीत है|"
डॉ राधाकृष्णन  20 सदी के वैज्ञानिक युग में  अपने अध्यात्मिक दर्शन से संसार को विमुग्ध किया|


जीवन में कार्य 

   डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कई नेशनल  और international संगठनो का नेतृत्वकिया | वे 1909 में मद्रास के कॉलेज में Teacher बने और बाद में मैसूर और कलकत्ता के विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफ़ेसर के रूप में भी कार्य किया|  राधा कृष्णन ने आन्ध्र विश्वविद्यालय  और काशी विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में भी कार्य किया और वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर भी रहे थे|

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1952-62 तक इंडिया के उपराष्ट्रपति बने और 1962 में वे india के राष्ट्रपति बने और उन्होंने 1967 तक इस पद पर ईमानदारी से कार्य किया| 

      डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन में लोगो को अपने विचारों और भाषण से लोगो को प्रभावित करने की अनोखी प्रतिभा थी|  जब वे देश के राष्ट्रपति थे तब 1962 में चीन से तथा 1965 में पाकिस्तान से युद्ध हुए थे और उन्होंने अपने ओजस्वी तथा प्रेरक भाषणों से देश के सैनिको का मनोबल बढ़ाया|

वे भगवतगीता के कर्मयोग के सच्चे कर्मयोगी थे| वे भारतीय संस्कृति और कला के प्रेमी थे| वे उदारता, मानवता, ईमानदारी के प्रतिमूर्ति थे|

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उपाधियाँ और पुरस्कार 

       डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन को देश-विदेश के बहुत से विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधियाँ प्रदान की थी|  
 उनको  भारत सरकार ने देश के सबसे बड़े सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया| 

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पुस्तकें

    डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने बहुत सी किताबे लिखी उनमे से प्रमुख है -
  •    द फिलोसोफी ऑफ़ द उपनिषद्स 
  •    ईस्ट एंड वेस्ट-सम रिफ्लेक्शन्स 
  •   ईस्टर्न रिलीजन एंड वेस्टर्न थॉट 
  •    इंडियन फिलोसोफी 
  •    एन आइडियलिस्ट व्यू ऑफ़ लाइफ 
  

मृत्यु 

   डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने अपने पुरे जीवन काल में लोगो को ज्ञान से आलोकित किया तथा उन्होंने मानवता और ईमानदारी का परिचय देते हुए लोगो को प्रेरित भी किया| 
 इस महान व्यक्ति के जन्म दिवस को आज हम teachers डे के रूप में मनाते है| क्योंकि वे एक शिक्षक से राष्ट्रपति बने और उनका मानना था की शिक्षक ही है जो देश की भावी पीढ़ी को सुधर सकता  है|


इस महान आत्मा का  16 अप्रैल, 1975 को निधन हो गया लेकिन उनके आदर्श और विचार आज भी हमे प्रेरित करते है|

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SC ST Act क्या है? और क्यों बनाया गया? हरिजन एक्ट की सजा ...


Scheduled Castes and Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ( अत्याचार ) निरोधक अधिनियम, 1989

sc st act in hindi 

SC ST Act कब आया ?

  अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम को राजीव गाँधी की सरकार ने 11 सितम्बर 1989 को संसद में पेश किया था. उस समय कांग्रेस के पास भारी बहुमत था इसलिए यह बिल उसी दिन पारित हो गया.

SC ST बिल को संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद इस पर 30 जनवरी, 1990 को राष्ट्रपति ने मुहर लगा दी और इसके बाद यह अधिनियम जम्मू कश्मीर को छोड़ कर पुरे भारत में लागु हो गया.

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SC ST Act क्यों बनाया गया?

   जब संसद में इस को पेश किया गया तब कहा गया था कि आजादी के बाद भी दलितों की स्थिति में कोई खास बदलाव नही आया है. आज भी SC ST के लोगो को दबाया जाता है और उन्हें अपमानित किया जाता है.

इन के साथ होने वाले अन्याय को परिभाषित नहीं किया जा रहा है और प्रभावशाली लोग अपने प्रभाव से हर उठने वाली आवाज को दबा देते है.
भारतीय दंड संहिता (IPC) और सिविल राइट एक्ट 1955 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगो को न्याय दिलाने में कमजोर पड रहे है. 

 इस कारण एसी एसटी के लोगो को न्याय दिलाने के लिए एक ऐसे कानून की जरूरत थी जो उन्हें अत्याचर से लड़ने में help कर सके. इन सभी बातों का हवाला देते हुए इस एक्ट को बनाया गया था.

SC ST Act किस पर लागु होता है ?

  SC ST Act उन सभी लोगो पर लागु होता है जो sc st cast से belong नहीं करते है. यह एक्ट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगो पर होने वाले अपराधों से रक्षा करता है.
इस act में 5 अध्याय और 23 धाराएँ है .

इस एक्ट के तहत यदि किसी sc st के व्यक्ति पर कोई upper cast का व्यक्ति अपराध करता है तो उस व्यक्ति पर IPC की धारा तो लगेगी परन्तु साथ ही sc st act की धारा भी लगेगी.


किस अपराध पर SC ST एक्ट लागु होता है?

 यदि कोई गैर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति sc st के व्यक्ति के खिलाफ निम्न मेसे यदि कोई भी अपराध करता है तो यह एक्ट प्रभावी होता है-

⦁    यदि किसी SC ST के व्यक्ति के साथ  व्यापार करने से इंकार करता है.

⦁    यदि SC ST के व्यक्ति को नौकरी देने से इंकार करना.

⦁    अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगो को जबरन मलमूत्र खिलाना या अपमानित करना.

⦁    उन्हें किसी सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना.

⦁    SC ST के व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करना.

⦁    एससी एसटी  के व्यक्ति के साथ मारपीट करना या परिवार के सामने अपमानित करना.

⦁    अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्ति के जबरन कपड़े उतारना और नंगा करके सार्वजनिक स्थल पर घुमाना.

⦁    इनके चेहरे पर कालिख लगाना या paint करना.

⦁    इस केटेगरी के लोगो को जबरन घर से निकालना या घर छोड़ने के लिए मजबूर करना.

⦁    अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्ति के खिलाफ झूठा आरोप लगाना .

⦁    SC ST की महिला को अपमानित करना या उसका यौन शोषण करना.

⦁    SC ST के व्यक्ति को किसी विशेष व्यक्ति को vote देने के लिए मजबूर करना.

⦁    अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति की भूमि पर जबरन कब्जा करना.

यदि इनमेंसे कोई अपराध किया जाता है तो उस पर SC ST Act, 1989 लागु होता है.

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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट में सजा क्या होती है?


⦁    यदि किसी व्यक्ति पर इस एक्ट के तहत केस दर्ज होता है तो उसकी तुरंत गिरफ्तारी की जाती है और उसे अग्रिम जमानत भी नहीं मिलती है.

⦁    पकडे जाने के बाद भी व्यक्ति को केवल high court ही जमानत दे सकता है.

⦁    sc st एक्ट के मामलो की सुनवाई एक विशेष अदालत करती है जो SC ST Act की धारा 14 के तहत बनाई गयी है.

⦁    व्यक्ति को IPC की सजा के अतिरिक्त इस एक्ट के तहत 6 महीने से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है.

⦁    यदि केस किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ है तो उसे तब ही दर्ज किया जा सकता है जब वो जाँच में दोषी पाया जाता है.

इस प्रकार अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम के तहत सजा होती है. लेकिन इस एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी होती है और जमानत भी नहीं मिलती इस कारण से कुछ लोग इसका दुरूपयोग भी करने लगे है.

किसी व्यक्ति या अपने साथी कर्मचारी से किसी दुश्मनी के कारण उसे इस एक्ट के तहत फसाया जाता है जिससे इस act का misuse होता है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट की मुताबिक 2016 में कुल 11060 केस दर्ज हुए जिनमेंसे 935 केस फर्जी निकले. अर्थात लगभग 10% और 2015 में लगभग 15% केस फर्जी पाए गये थे.

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को उदार बनाने की पहल की है.

SC ST Act में सुप्रीम कोर्ट ने क्या बदलाव किए?


⦁    सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि sc st act के मामलो की जाँच डिप्टी sp रैंक के अधिकारी करेंगे. पहले इन मामलो की जाँच इंस्पेक्टर करता था.

⦁    किसी भी सरकारी अधिकारी को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

⦁    किसी आम आदमी को भी तुरंत पकड़ा नहीं जाएगा उसको गिरफ्तार करने के लिए sp या एसएसपी से अनुमति लेनी होगी.

⦁    किसी भी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी जा सकती है और जमानत देने के अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होगा. पहले केवल हाई कोर्ट ही जमानत दे सकता था.


सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने यह फैसला सुनाया है.



सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ लोगो का कहना है की इससे sc st के लोगो के खिलाफ अपराध बढ़ेंगे क्योंकि यदि डिप्टी रैंक का अधिकारी जाँच करेगा तब तक प्रभावशाली लोग अपनी ताकत से मामले को दबा देंगे.

और साथ ही कुछ लोगो का कहना है की ससे फर्जी केसों में कमी आएगी और राजनैतिक दुश्मनी निकलने के लिए जो केस किए जाते थे उनमे कमी आएगी. जिससे किसी बेगुनाह को अपमानित अन्हीं होना पड़ेगा.

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शिक्षा पर प्रेरणादायी कथन | thoughts on education

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शिक्षा के द्वारा व्यक्ति अपने आप को जानने लगता है और उसे सही गलत का भान रहता है. Education ही वो हथियार है जिसके बल पर हम अपने आप को और संसार को बदल सकते है. आज हम gyandrashta.कॉम पर Quotes About Education in hindi post kar rahe hae.


शिक्षा पर महान लोगो के विचार 

 

1.  लड़के को शिक्षा उसी मार्ग को दें जिसमें उसको चलना चाहिए. तब वह  बुढ़ापे में भी उससे न हटेगा.
                       नीतिवचन


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2.  शिक्षा मनुष्य की आत्मा के लिए उसी भांति है, जिस प्रकार संगमरमर के लिए शिल्पकला.
                      एडिसन


3.  शिक्षा जीवन की तैयारी का शिक्षणकाल है.
               -विल्मट


4.  यहाँ समस्या बहुत है, लेकिन मेरे विचार से सभी का समाधान शिक्षा ही है.
              - मलाला यूसूफ़जई


5.  शिक्षा सबसे ताकतर हथियार है जिससे आप दुनिया को बदल सकते है.
              नेल्सन मंडेला


6.  "शिक्षा का उच्चतम परिणाम सहनशीलता है।"
            -  हेलेन केलर


7.  सदाचार और निर्मल जीवन सच्ची शिक्षा का आधार है.
                  -मदनमोहन मालवीय


8.  शिक्षा का ध्येय चरित्र-निर्माण है.
                 हर्बर्ट स्पेंसर


thoughts on education

9.  शिक्षा केवल ज्ञानदान नहीं करती, वह संस्कार और सुरुचि के अंकुरों का पोषण भी करती है.
               -अज्ञात

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10.  अगर मनुष्य सीखना चाहे, तो हर भूल उसे शिक्षा दे सकती है.
                  - महात्मा गाँधी


11.  इन पांच बाधाओं के कारण मनुष्यों को शिक्षा प्राप्त नहीं होती - अभिमान क्रोध, प्रमाद, रोग और आलस्य.
                  अज्ञात


12.  संसार में जितने प्रकार की प्राप्तियाँ है, शिक्षा सबसे बढ़कर है.
                   निराला


13.  आप किसी व्यक्ति को कुछ नहीं सिखा सकते हैं, आप उसे अपने भीतर खोजने में मदद कर सकते हैं। 
                      - गैलिलियो गैलिली


14.  शिक्षा की जड़ कड़वी  है, लेकिन फल मीठे है
                -अरस्तू


15.  शिक्षा जीवन में सफलता की कुंजी है, और शिक्षक अपने छात्रों के जीवन में स्थायी प्रभाव डालते हैं।
                       - सोलोमन ऑर्टिज़

importance of education in hindi


16.  शिक्षा आजादी के सुनहरे दरवाजे खोलने की कुंजी है.
               जॉर्ज वाशिंगटन कार्वर


17.  शिक्षा से ही मनुष्य का सर्वांगींण विकास होता है.

स्वामी विवेकानन्द के अनमोल कथन
महापुरुषों के अनमोल संदेश
महारानी पद्मिनी की कहानी

18.  शिक्षा का उद्देश्य तथ्यों का नहीं, मूल्यों का ज्ञान कराना है.
                  William S. Burroughs


19.  एक स्थायी सेना की तुलना में शिक्षा स्वतंत्रता की बेहतर सरंक्षक  है
               एडवर्ड एवरटार्ट

thoughts in hindi on education


20.  शिक्षा हिंसा का एक टिका (vaccine) है.
            -Edward James Olmos


21.  शिक्षा जीवन के लिए तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है.
                    -John Dewey


22.  शिक्षा समाज की आत्मा है, क्योंकि यह एक पीढ़ी से दूसरे तक पहुंचती है.
                -G.K. Chesterton


23.  शिक्षा ... ने एक विशाल जनसंख्या को पढ़ने में सक्षम बना दिया है, लेकिन जो पढने लायक है उसे पहचानने में असमर्थ।
                -G.M. Trevelyan


24.  शिक्षा समस्या नहीं,  शिक्षा एक मौका है
               Lyndon Johnson


25. जब सभी लोग साथ छोड़ देते है तब शिक्षा ही मनुष्य की सच्ची मित्र होती है.


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गुरू और शिष्य की कहानी Guru or shishy ki kahani in hindi

           प्रेरक कहानी Motivational story

एक समय  की  बात  है  एक गांव  मे एक गुरु जी रहते थे । वे बहुत ज्ञानी और विख्यात महात्मा थे। उनके बारे मे कहा जाता था कि उन्हे एक ऐसे मंत्र का ज्ञान प्राप्त है जिससे मृत व्यक्ति भी जिन्दा है।

आरक्षण व्यवस्था पर निबंध | essay on reservation policy in hindi


जब इस बात का पता गांव वालो को लगा तो कई लोग उनके शिष्य बन कर उनकी सेवा करने लगे, जिससे कि गुरूजी प्रसन्न हो कर उन्हे वो अद्भुत मंत्र दे ।
एक युवा आदमी भी यही विचार करके गुरूजी की सेवा करने लगा ।
वह नित्य समय पर आता और गुरूजी की सेवा करता था ।
सभी शिष्य गुरूजी से जीवन दान देने वाला मंत्र देने की मांग करते तो गुरूजी यह कहकर टाल देते की समय आने पर वह मंत्र दिया जाएगा । समय बितता गया ।

एक दिन गुरूजी ने सभी शिष्य को बुलाते हुए कहा कि मै आप लोगो को वह मंत्र दे रहा हू लेकिन आपका उसे एक साल तक सिद्ध करना होगा तभी यह मंत्र काम करेगा।
गुरूजी ने सभी को वह मंत्र दे दिया । लेकिन संयोगवश वह युवा शिष्य उस दिन गुरुकुल नही आया था।
सभी लोग मंत्र सिद्ध करने मे लगे गय, जब अगले दिन वह युवा शिष्य आया तो उसे इस बात का ज्ञान हुआ की गुरूजी ने सभी को मंत्र दे दिया और वे सभी उसे सिद्ध करने के लिए तपस्या कर रहे है।

युवा शिष्य दौङता हुआ गुरूजी के पास गया और उनसे मंत्र देने की विनती करने लगा । गुरूजी ने कहा कि उन्होंने कल सभी को मंत्र देन दिया तुम नही आए ये तुम्हारी गलती है अगली बार ऐसा समय आएगा तब मै तुम्हे मंत्र दुंगा।

शिष्य ने सोचा पता नही वह समय कब आए तब तक मेरे साथी मंत्र को सिद्ध भी कर लेगे । यह सोचकर वह गुरूजी के पिछे हि पड़ गया और मंत्र देने की विनती करने लगा।
सोते उठते, खाते-पीते हर समय वह गुरूजी से मंत्र देने की मांग करता । गुरूजी भी उससे परेशान हो गए ।

एक दिन गुरूजी निवृत्त होने जंगल मे जा रहे थे तो शिष्य भी उनके पीछे हो गया और मंत्र देने की मांग करने लगा।
गुरूजी ने कहा समय आने पर दुंगा ।
शिष्य आज उनसे मंत्र लेने का निश्चय कर के आया था और गुरूजी निवृत्ति के लिए बैठे वहा जाकर कहने लगा गुरूजी मंत्र ।
 गुरूजी गुस्सा हो गए और कहा " टेम दैखे न कटेम भाग अठै सूं "
शिष्य ने सोचा यही मंत्र है और वह खुश होकर उस मंत्र का जाप करने लगा ।



प्रेरक कहानी


कुछ समय बाद गांव मे एक युवा लड़के की मौत हो गई । उसकी अभी कुछ समय पहले शादी हुई थी । सभी बहुत दुखी थे । उस व्यक्ति के शव को श्मशान घाट लाया गया । तभी लोगो को याद आया कि यहा पर कुछ लोग है जो मृत व्यक्ति को जिन्दा करने का मंत्र का जप कर रहे है। सभी लोगो ने उन्हे बुलाया ।   सभी शिष्य आए और मंत्र का प्रयोग किया लेकिन कोई असर नही  हुआ ।

किसी ने कहा कि एक ओर साधु है वह भी तपस्या कर रहा है उसे बुलाया जाए ।उसे युवा साधु को बुलाया गया । उसने आते ही मंत्र का प्रयोग किया " टैम देखे न कटैम भाग अठै सूं " और अचानक मृत व्यक्ति जीवित हो गया ।

सभी शिष्य गुरूजी के पास गए और कहने लगे कि आपने उन्हे गलत मंत्र दिया और उसे को सही ।
गुरूजी ने कहा कि मैने तो उसे मंत्र नही दिया ओर कहा कि उसको बुलाओ।
वह युवा शिष्य आया तो गुरु ने पुछा की मैने तुझे मंत्र कब दिया ।
शिष्य ने कहा कि आपने दिया था " टैम देखे न कटैम देखे भाग अठै सू "
गुरू ने कहा यह मंत्र नही था यह तो मैने तुझे जाने के लिए कहा था । यह तेरी श्रद्धा और भक्ति से सिद्ध हो गया ।


शिक्षा   इस कहानी से दो शिक्षा मिलती है ।

     ● जो भी काम करो उसे निरन्तर करो एक दिन भी उसे नही छोडना चाहिए । जैसे इस कहानी मे वह शिष्य एक दिन नही आया और मंत्र पाने से चुक गया ।
    ● दूसरी शिक्षा मिलती है कि जो काम करो पुरे मन लग्न और श्रद्धा के साथ करो तो वो निश्चित ही पूर्ण होता है । जैसा कि शिष्य ने अपने लग्न से डाँट को मंत्र के रूप मे सिद्ध कर दिया ।


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आरक्षण का भुक्तभोगी हिन्दी कहानी story on reservation


Story On Reservation Policy

हिन्दी कहानी " आरक्षण का भुक्तभोगी  "

'Good Morning Sir ' चपरासी ने विनम्रता के साथ  Files को Set कर रहे बड़े साहब का अभिवादन किया ।
'Good Morning , और रामलाल क्या हालचाल है? ' अपनी नजर उठाये बिना ही सिंह साहब ने पूछा ।
'सब ठीक है साहब! हमारे जिले के कलेक्टर साहब Transfer हो गया है ।'  रामलाल ने जानकारी देते हुए कहा ।
' क्या? कौन आया है अब उनकी जगह ' सिंह साहब ने आश्चर्य से पूछा ।
' कोई वर्माजी है साहब । '

reservation


'अच्छा ठीक है तुम जाओ और सुनो आज का अखबार चेम्बर मे पहुंचा देना ।' सिंह साहब ने आदेश देते हुए कहा ।
'जी साहब '
सिंह साहब अपने काम मे Busy हो गये और Table पर बिखरी फाइलों को निपटाने लगे।
इतने मे रामलाल अखबार लेकर आ गया और  पेपर Table पर रख कर चला गया ।

सिंह साहब फाइलों के ढेर से अपने आप को बाहर निकाल कर अखबार पढने लगे ।
' अरे यह क्या ? इसे तो मै जानता हूँ ।' अखबार मे छपी Photo देखकर मन ही मन कहा ।

स्मृति पटल पर पुराने दृश्य उभर कर सामने आने लगे । बचपन मे हम दोनो साथ ही पढते थे और हमेशा साथ साथ स्कूल जाते थे । हम दोनो के हालात एक जैसे ही थे । पर वर्माजी की जाति आरक्षण पाने वाली मे से थी इसलिए उसे Government की तरफ से Help भी मिलती थी। लेकिन मुझे कुछ नही मिलता था क्योंकि मे General Category से था ।

12 वी की परीक्षा First Division से Pass करने के बावजूद शहर की College मे प्रवेश नही मिला । जबकि वर्माजी के काम Marks के बावजूद selection हो गया ।

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उस वक्त मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ ऐसा क्यो?
तब मेरा आरक्षण से पहली बार सामना हुआ   । उसके बाद तो यह सिलसिला चलता ही रहा । अच्छे Marks आने के बावजूद भी न कोई Government की तरफ से छात्रवृति मिलती और न कोई सरकारी नौकरी मे फायदा मिलता । लेकिन आरक्षण से कम अंक वाले आगे आने लगे और Government Job पाने लगे ।

कडी मेहनत और नियमित परिश्रम से RAS Exam मे अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद भी Selection नही हुआ और वर्माजी का आरक्षण ( Reservation ) की वजह से कम नंबर आने के बाद भी सलेक्शन हो गया।
योग्यता होने के बावजूद वे सिर्फ एक सरकारी बाबू बन कर रह गए । और कई सालो से प्रमोशन नही हुआ लेकिन वर्माजी Promotion से कलेक्टर बन गये ।

अखबार मे छपी अपने बचपन के दोस्त की Photo देखकर मन ही मन खुश हो रहे थे कि   उनका Friends आज बडी पोस्ट पर पहूँच गया ।
लेकिन एक ओर यह सोच कर दुखी हो रहे थे कि इस देश का क्या हाल होगा ?

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जब कम नंबर वाले अफसर बन रहे है और ज्यादा नंबर वाले बेरोजगार घुम रहे है।
जहाँ देखो वहा Reservation का ही बोलबाला है।  सिंह साहब मन ही मन इस व्यवस्था को कोसने लगे ।
फोन की घंटी के साथ ही स्मृति से बाहर आए और Phone Received किया " हैलो "
' हैलो, पापा मै बोर्ड परीक्षा मे जिले मे प्रथम स्थान पर आया हूँ '  सिंह साहब के बड़े बेटे हनी ने उत्साह के साथ जानकारी दी ।
' बहुत अच्छा, शाबास बेटा' कहकर सिंह साहब ने फोन काट दिया ।

मन ही मन कहने लगे ' बेटा मै जानता हूँ मै आरक्षण का भुक्तभोगी हू मुझे पता है कि क्या फायदा मेरिट मे आने का । आरक्षण प्रतिभा को दबा देगा कभी आगे बढने नही देगा और बेटा तुम्हे इसका आभास हो जाएगा ।
खैर जो होगा देखा जायेगा  । बेटा तुम Success हो और आशा करूगा की तुम "आरक्षण के भुक्तभोगी " न बनो ।
दिल से बेटे को दुआ देते हुए सिंह साहब फाइलों के साथ माथापच्ची करने लगे ।


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