सुख शांति कैसे प्राप्त करे motivational stories in hindi

     प्रेरणादायी कहानी सुख, शांति और सफलता कैसे प्राप्त करे?

 

आमतौर पर हम देखते है की बहुत से लोग जब भी मिलते है तो life से जुडी कोई न कोई problem लेकर ही बैठ जाते है. वे हमेशा problem की ही शिकायत करते है. और उन लोगो में हम भी कई बार शामिल हो जाते है. जब भी हमे मौका मिलता है तो शिकायत लेकर बैठ जाते है. जो मौका मिलता है उसे व्यर्थ में हाथ से जाने देते है.
आज हम इसी से related एक hindi short moral story post कर रहे है कि किस तरह हम किस तरह शिकायत कर कर के अपने valuable time को west करते है.


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पुराने समय की बात है जब शिक्षा school में न देकर आश्रम में दी जाती है. आश्रम में शिष्य को वहाँ पर ही रहना होता था और उस समय माना जाता था कि मौन रहकर ही ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है.

ऐसे ही एक आश्रम में एक गुरूजी शिक्षा देते थे. उनके आश्रम में भी बहुत से शिष्य ज्ञान प्राप्त करते थे. वहाँ पर एक नियम था की सभी को मौन रहना होता और केवल पांच वर्ष में एक बार ही बोल सकते थे वो भी दो शब्द.

उस आश्रम में ज्ञान प्राप्त कर रहे एक शिष्य के जब पांच साल पुरे हो गये तो वो गुरु के सामने गया तो गुरु ने उसे बोलने के लिए कहा. शिष्य ने कहा-
"भोजन खराब."
गुरु ने कहा ठीक है.
ऐसे करते करते पांच साल ओर बीत गये और शिष्य फिर गुरु के पास गया और बोला-"बिस्तर कठोर." गुरु ने सिर्फ गर्दन हिला दी. ऐसे ही पञ्च साल बीतने के बाद वापिस वो शिष्य गुरु के पास आया तो गुरु ने बोलने का संकेत किया. शिष्य ने कहा -"घर जाना" गुरु ने कहा जा सकते हो.

दुसरे शिष्यों ने कहा की आप ने उसे बिना शिक्षा पूरी किए क्यों जाने दिया? गुरूजी ने जवाब दिया की -
"जो व्यक्ति अपने जीवन के 15 महत्वपूर्ण  साल सिर्फ शिकायत करने में ही व्यर्थ निकाल दिए. और जिसे सिर्फ शिकायत करने का ही मौका चाहिए वो फिर कैसे ज्ञानी बन सकता है?
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 कई बार हम भी उस शिष्य की तरह जाते है और शिकायत लेकर ही बैठ जाते है. क्या वो शिष्य पांच साल में खाना बनाना सीख करके अपने और दूसरों के लिए अच्छा भोजन बना सकता था लेकिन नहीं वो तो केवल शिकायत करना ही चाहता था फिर उसे कैसे success मिल सकती है.

हम भी इसी तरह अपनी समस्या को लेकर बैठ जाते है उसका ही रोना रोते है लेकिन  उस समस्या का खुद समाधान नहीं निकालकर इसका दोष दूसरों पर डालते है और शिकायत करते रहते है.  लेकिन life में सफलता पानी है तो शिकायत नहीं कर्म करो.

एक ओर बात देखे तो वो शिष्य सुख चाहता था जैसे अच्छा भोजन, बिस्तर, व्यवस्था आदि. लेकिन करता वो सिर्फ शिकायत ही था. इसका एक मतलब यह भी हो जाता है की उसमे काबिलियत नहीं थी और वो केवल दोष निकलता था.

इसी लिए यदि हमे सुख पाना है तो शिकायत नहीं करके अपनी काबिलियत को बढ़ाना है. यदि हमे अच्छा भोजन प्राप्त करना है तो घर वालो से बार बार शिकायत करने की अपेक्षा आप ही भोजन बनाना सीख लीजिए जिससे आपकी पसंद का खाना बन जाएगा और घर में भी सुख शांति रहेगी.
केवल बोजन ही नहीं सभी विषय पर शिकायत करने की बजाय काबिलियत पर ध्यान दो.

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विरम सिंह
विरम सिंह

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2 comments:

  1. शिकायत करने की अपेक्षा आत्म सुधार जरूरी है , जो व्यक्ति केवल शिकायत करने में ही जिंदगी निकाल देता है वह खुद कुछ नहीं सीख पाता | जरूरी है खुद को सुधारना ...प्रेरणादायक कहानी

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  2. बहुत ही अच्छी और प्रेरणादायक कहानी है. गुड जॉब

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