रामायण की प्रेरणादायी कहानी | Ramayana Inspiring Story In Hindi


आप छोटे बच्चे है तो भी चिंता न करे , अगर आप निर्धन है तब भी फिक्र नि करे - जिस तरह भी आप औरो के काम आ सकते है आने की कोशिश करे ।
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अब आपके मन मे सवाल होगा कि ऐसा कैसे हो सकता है ? छोटे , बड़े की Help कैसे कर सकते है ? 
तो आपके इन सभी सवालो के जवाब चुपे है रामायण की इस motivational घटना मे । 

Ramayan inspiring story


रामायण की प्रेरणादायी कहानी
Ramayana inspiring story 

जब श्री राम ने लंका विजय अभियान start किया । समुद्र पार करने के लिए समुद्र पर पत्थरों का पुल बनाना शुरू किया । पत्थर पर पत्थर लगाए जा रहे थे कि श्री राम ने देखा एक गिलहरी (Squirrel) पानी मे जाती है , फिर मिट्टी पर आती है और फिर पत्थरों के बीच जाती है। वापस आती है फिर पानी मे जाती है , मिट्टी पर आती है और फिर पत्थरों के बीच चली जाती है । वह बार बार लगातार यही किए जा रही थी ।

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श्री राम ने सोचा, आखिर यह गिलहरी कर क्या रही है । उन्होंने हनुमानजी से कहा , इस गिलहरी को पकडकर लाओ तो । हनुमानजी गिलहरी को पकड कर लाये और रामजी के हाथ मे दे दी ।

रामजी ने गिलहरी से पूछा ,- तुम यह बार बार क्या कर रही हो ? मै समझ नही पा रहा हूँ । तुम पानी मे जाती हो , फिर आकर मिट्टी मे लोटपोट होती हो , फिर पत्थरों के बीच जाती हो और कुछ करके वापिस आ जाती हो ।
इस पर उसने कहा ,' भगवान! मैने सोचा , पतिव्रता सीता माता की रक्षा के लिए , उसकी आन - बान और शान रखने के लिए आप लंका पर चढाई करने जा रहे है , वानरों की सेना आपके साथ, युद्ध मे सहयोगी बन रही है तो मैने सोचा मै भी सहयोगी बनू । मेरे पास और तो कुछ help करने के लिए नहीं था क्योंकि इन पत्थरों को उठाने की क्षमता ( Power ) तो मुझमे नही है तो मैने सोचा इन पत्थरों के बीच मे जो खाली जगह है उसे मिट्टी डाल डालकर बर दूं , ताकि जब आप सेना सहित इस पर से गुजरें तो ये पत्थर आपको न चुभे ।

भगवान श्रीराम ने कहा, ' गिलहरी, तू महान Great है, पर एक बात तो बता । यहाँ तो इतनी बडी सेना ( Army ) है और तू छोटी सी बार बार आ जा रही है, अगर किसी के पाँव के नीचे आकर मर गई तो ?
'गिलहरी ने कहा , ' प्रभु! तब मै यह सोचूंगी कि नारी जाति के शील और धर्म को बचाने के लिए जो युद्ध लडा गया उसमे सबसे पहले मै काम आई ।'
तब श्रीराम ने गिलहरी की पीठ पर स्नेह प्रेम और वात्सल्य से भरकर अगुलियाँ चलाई और कहते है कि गिलहरी की पीठ पर फेरी भगवान की अगुलियाँ के निशान आज भी दिखाई देती है और श्रीराम ने कहा ' लंका विजय अभियान मे सबसे बडा सहयोग तुम्हारा है ।
शिक्षा Moral
         तुम छोटे हो तो यह मत सोचो कि तुम कुछ नही कर सकते । जो तुम्हारी हैसियत है तुम उतना तो करो । जो औरो के वक्त - बेवक्त मे काम आता है । उनका वक्त बेवक्त नही आता है , जो दूसरो के लिए आहूति देता है। ईश्वर के घर से उसके लिए आहुतियाँ समर्पित होती है ।



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विरम सिंह
विरम सिंह

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