कविता महिलाओ से | Women poem


Women-poem


हर दिन सड़को पर मचली जाती हो ।
सिर्फ सिसकियाँ भर रह जाती हो ।।
फिर भी कहती अबला नही, हम है सबला ।
क्यों ओढ रखा है कायरता पर वीरता का चौला ।।


तुम्ही लक्ष्मी बाई, तुम्ही हो कर्मावती ।
तुम्ही महारानी पद्मिनी ,तुम्ही हो हाड़ी रानी ।।
क्यो सहती हो अन्याय को ।
क्यो मचली जाती हो नामर्दो के हाथो ।।


चुप बैठे ना काम चलेगा, कर्मावती बनना होगा ।
महिषासुरो का बढ गया है अन्याय, दुर्गा बनना होगा ।
आँखो मे वो ज्वाला जगानी होगी ।
पापियों के नाश  के लिए , तलवार उठानी होगी ।।


उतार फेको यह दिखावे का चौला ।
तोड डालो सामने उठती हर अँगुली ।।
फोड़  डालो हर वो  आँख ।
जिसमे हो वासना की आग ।।


           विरम सिंह

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2 टिप्पणियाँ

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September 22, 2016 at 6:49 AM ×

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 23 सितम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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September 22, 2016 at 3:17 PM ×

धन्यवाद यशोदा जी

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