वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


चन्द्रसेन राठौड़

मायड़ थारों वो पुत कठै
वो मरूधरा रो लाल कठै
वो मालदेवजी रो सपूत कठै
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


मायड़ थारों वो पूत कठै...2

आजादी  खातिर जंगल जंगल घुमनीयों
वो आजादी रो दिवानो कठै ।
अकबर  री आँख रो काँटो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै....2

वो जुझेयों घणो अकबर री सेना रे आगे,
मान बचावण मरूधरा रो 
वो जोधाने रो शेर कठै ।
भाद्राजून और सिवाणा री धरा पर ,
अकबर ने  सबक सिखावण वालो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै ।


नागौर दरबार मे रजपूती री आन राखनियों
वो मारवाड़ रो सूरज कठै ।
स्वाभिमान री अलख जगान जगानियों
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै 
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।

       विरम सिंह सुरावा


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विरम सिंह
विरम सिंह

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6 comments:

  1. Chandrasen hamre ander jInda he azadi ki aag ke rup me jai rajputana

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  2. प्रद्युम्न सा इतिहासकारो ने चन्द्रसेन जी ज्यादा नही लिखा है यह भी प्रताप जी की तरह स्वाभिमानी और आजादी के दिवाने थे

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  3. आजादी खातिर जंगल जंगल घुमनीयों
    वो आजादी रो दिवानो कठै ।
    अकबर री आँख रो काँटो
    वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।
    ..जाने कितने ही आजादी के दीवानों ने अपनी कुर्वानी दी है। . नमन
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  4. धन्यवाद कविता जी
    सही कहा इस रेतीली भूमि पर ऐसी कई कुर्बानी दबी पड़ी है।

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  5. बहुत ख़ूब .. आज़ादी के परवानों को नमन है ... आँचलिक भाषा का कमाल दिख रहा है ...

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  6. धन्यवाद दिगम्बर जी

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