मै और मैना का रहस्य Best inspirational story in hindi


Best inspirational story in hindi


एक किसान के घर पर बकरी भी थी और मैना भी थी ।  दोनों ही बोलती रहती थी । किसान की old mother बकरी की ‘मै – मै ‘ आवाज सुनकर बहुत नाराज होती थी । उसे गुस्सा आता तो वह डंडा लेकर उस पर वार कर देती थी। कभी उसके कानो में मैना की मधुर आवाज गूंज उठती –“मैना, मैना, मैना....” वर्षो तक यह क्रम चलता रहा । एक दिन कबीरदास उस किसान के घर आये । 
किसान की बूढी माताजी ने कहा –“ कबीरदासजी ! आप तो अनुभवी संत हो महाराज ! मे परेशान हूँ की बकरी और मैना दोनों बोलते है पर जब बकरी की आवाज गूंजती है तब मुझे जरा भी नहीं सुहाती है।”
“ माताजी ! आपको बकरी की आवाज अच्छी नहीं लगती पर मैना की आवाज तो अच्छी लगती होगी ?” कबीरदासजी ने पूछा ।
“ हाँ महाराज ! मैना की मीठी मीठी आवाज से मै ही क्या हर सुनने वाला मस्त हो उठता है ।” वृद्धा बोली ।
“तो बताओ  मैया! मैना का गाना आपको इत्नस मीठा क्यों लगता है। ।"
“मै नही जानती बाबा पर यह बात ठीक है कि दूध देने वाली गाय की लात तो सही जाती है पर दूध देने वाली बकरी की बेसुरी आवाज नहीं सुनी जाती । आप ही बताइये बाबा कि ऐसा क्यों होता है । "वृद्धा ने अपनी बात तसल्ली से कही 
   तब कबीरदासजी ने समझाया –“ अम्मा जी दोनों ही अपने मन की बात कहती है । कहने के पीछे जो भाव है बस उसका ही फर्क है ।"  
 “कबीर महाराज! मै समझी नहीं यह फर्क क्यों है? आप जरा मुझे अच्छी तरह समझा दो ताकि मै बकरी से नाराज न रहूँ ।” वृद्ध ने आग्रह किया ।
कबीरदासजी ने तब समझाते हुए कहा –“ मेरी मैया ! मैना मीठे सुर में जब मै ना , मै न, मै ना कहती है तब मै नहीं , मै नहीं, इस बात को कहकर अपने मन के छोटेपन और संकुचित दृष्टिकोण से अनायास ही मुक्त हो जाती है । इसलिए उसके बोल सभी को अच्छे लगते है । इधर बकरी बोलती है तो ‘मै-मै-मै ‘ की आवाज गूंजती रहती है। इसलिए उसका बोलना अच्छा नहीं लगता । उसमे उसका अहं जो बोलता है ।"
          “ हाँ बाबा! मै अब समझ गई, अपने आपको संकुचित दृष्टिकोण से मुक्त रखना चाहिए ।"
   इस व्यावहारिक सत्य का वृद्धा को बोध करवाकर कबीरदासजी चल दिए अपनी रहा |

इस प्रसंग से हमें सीख मिलती है की हमें हमारे बोल मीठे रखने चाहिए और अहं भाव से ग्रसित बोल नहीं बोलने चाहिए , क्योकि लोगो को अच्छे वचन प्रिय होते है इसलिय तो कोयल और कौए का रंग एक होने के बावजूद लोग मीठे बोल बोलने वाली कोयल को पसंद करते है   

यह भी पढे
गंगाजी धरती पर कैसे आई 

विरम सिंह
विरम सिंह

This is a short biography of the post author. Maecenas nec odio et ante tincidunt tempus donec vitae sapien ut libero venenatis faucibus nullam quis ante maecenas nec odio et ante tincidunt tempus donec.

2 comments: