श्री कृष्ण नारद चर्चा

दोस्तो जन्माष्टमी पर भगवान् श्रीकृष्ण और नारदजी की काल्पनिक वार्तालाप प्रस्तुत कर रहे है यदि यह पोस्ट आपके दिल को छू जाए तो शेयर अवश्य करे ।
     
                    वार्तालाप
नारदजी - अरे प्रभु! आज आपका जन्मदिन ( जन्माष्टमी ) है और आप इतने उदास कैसे ?
श्री कृष्ण - अरे नारदजी इसकी तो चिंता है । जन्माष्टमी के दिन रात्रि 12 बजे  news chanel खोलकर तो देखो , आप को सब पता चल जाएगा  ।
नारदजी - ऐसा क्या चल रहा है news मे ?
श्री कृष्ण - जन्माष्टमी पर ' मथुरा, वृंदावन और गोकुल ' मे दुध और दही से लोग मेरी मूर्ति का अभिषेक कर रहे है । और सारा द्रव पानी की तरह बह रहा है ।
नारदजी - अरे प्रभु ! यह तो भक्तो का आपके प्रति प्यार है ।
श्री कृष्ण - मुनीवर  मेरा एक बेटा मंदिर के बाहर दो - तीन दिन से भूखा पड़ा है और दुसरा बेटा मूर्ति पर अभिषेक करके दुध दही बर्बाद कर रहा है तो दुख तो होगा ।
नारदजी - बात तो विचार करने लायक है । तो प्रभु आपकी क्या इच्छा है ?
श्री कृष्ण - जिस प्रकार मिष्ठान आदि का थोड़ा भोग मुझे चढ़ा कर बाकी प्रसाद रूप मे बांट दिया जाता है उसी प्रकार दूध दही का थोड़ा सा भोग लगा कर शेष द्रव मेरे भक्तो मे बांट देना चाहिए ।
नारदजी - परन्तु आपकी यह बात भक्तो तक पहूचाएँ कैसे ?
श्री कृष्ण - इसलिए तो आपको याद किया है मुनिवर, समाचार फैलाने का काम आपसे ज्यादा अच्छा कौन कर सकता है ?
नारदजी - प्रभु मै अकेला किस किस को समझाउगा ? मेरे पास एक आईडिया है ।
श्री कृष्ण - तो देर क्यो ? बताओ
नारदजी - आज कल पृथ्वी लोक पर social sites के माध्यम से कोई भी संदेश सभी लोगो तक पहूचाया जा सकता है । और आज के युवा इस संदेश को फैला कर यह फालतू दिखावा बंद करा सकते है ।
श्री कृष्ण - बहुत अच्छा विचार है आपका ।
नारदजी - अब मुझे आज्ञा दिजिए ! नारायण ...... नारायण
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राजस्थानी लोक साहित्य में नीतिगत सीख Hindi Motivational Quotes


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राजस्थानी लोक साहित्य में नीतिगत तत्वों की बात करे तो पता चलता है कि राजस्थानी लोक साहित्य समृद्ध है तथा प्रत्येक मनुष्य के लिये नैतिक आचार संहिता का कार्य करता है ।
   राजस्थानी साहित्य में यश प्राप्ति को सदा से सर्वश्रेष्ठ माना है। इस यश के सामने भौतिक सुख और सम्पदा सदा से गौण है और यह तभी संभव है जब इस प्रकार की सीख मिले –
   मूरत सुन कीरत बड़ी , बिन पांखा उड़ जाय।
  मूरत तो मिट जावसी, कीरत कठे न जाय ।।

मनुष्य जीवन के लिये लाभाकारी और फलदायी बातों की सीख लोक काव्य में पग पग पर मिलती है और इन बातो में जीवन का निचोड़ होता है -                                                                
    बलता तो दीपक भला, वलता भला विघन्न।
  गलता तो वैरी भला, वलता भला सुदिन्न ।।
विद्या वापरती भली, भरतो भलो निवाण।
पंडित तो कथतो भलो , स्रोता भलो सुजाण ।।
चन्दण री चिमठी भली, गाडों भलो न काठ ।
चातर तो एक ही भलो, मूरख भला न साठ ।।
नित को भलो न बरसनो , नित की भली न धूप ।
नित को भलो न बोलणो , नित की भली न चूप ।

“ राजस्थानी वात “ , राजस्थानी लोक साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग है, इन बातों को मांडने (कहने) से पहले कुछ छोगे कहे जाने की परम्परा है । इन छोगों में नीतिगत सीख भरपूर होती है और ये होते भी बड़े सरस है –
 बात सांची भली, पोथी बांची भली।
देह साजी भली, बहु लाजी भली ।।
लुवां बाजी भली, नौबत गाजी भली ।
मौत मौड़ी भली, मनसा थोड़ी भली ।।
घाव पाटी भली, भाख फाटी भली ।
मैथी फाकी भली, साख पाकी भली ।।
पंथ गाड़ी भली,  भैंस पाडी भली ।।

इन्ही छोगों में संसार के खोटे कामों से भी अवगत कराने के लिये नसीहत दी जाती है कि –
  भोजाई रो बोल खोटो, रुपिया रो रोल खोटो ।
बानिया रो आसो खोटो, जेल रो बासो खोटो ।
अकलियै रो लाटो खोटो, बामण रो आटो खोटो ।।
अवड बिचै छाली खोटी, खेत बिचै बाली खोटी ।।
बाबोजी रै चेली खोटी, घर आली तो बोली खोटी ।।

लोक जीवन से जुड़े फलदायी व दुखदायी पहलुओ का प्रगटीकरण भी इन्ही छोगों में होता है –
   सियाले रो मेह भून्ड़ो , तिरिया बिना गेह भून्ड़ो ।
ऊगोनो तो खेत भून्ड़ो, परनारी सु नेह भून्ड़ो ।।
भगतन सु हेत भून्ड़ो, उधारी बौपार भून्ड़ो।
विधवा रो बनाव भून्ड़ो, साधू वालो हेत भून्ड़ो ।।
मौसर री रीत भुंडी, दासी सु प्रीत भुंडी ।
पाड़ोसी सु राड़ भुंडी, काँटा री तो बाड़ भुंडी ।।
डुंगर री चड़ाई भुंडी, सांसी सु लड़ाई भुंडी ।
आकड़े री राख भुंडी, दिवालिये री साख भुंडी ।।
खीचड़ में लादो भून्ड़ो, घरे हिलियो खोदो भून्ड़ो ।।

आज all world में पर्यावरण को लेकर बड़ी चिंता व्यक्त की जाती है लेकिन यहाँ का लोक तो सदैव से कहता आया है –
  आक न अहलो काटिये, नीम न घालो घाव ।
जो रोहीड़ो काटसी, दरगा होसी न्याव ।।
पीपल काटे हल खड़े, धन कन्या को खाय ।
सींव तोड़ खेती करे, जड़ा मूल सु जाय ।।

राजस्थानी लोक साहित्य का नीति तत्व जीवन के गहरे अनुभवों का निचोड़ है और इसमें कष्ट सहन करके भी मानवता को न छोड़ने की प्रेरणा दी जाती है ।
आपको हमारी यह सीख से भरी हुई post कैसी लगी , comment करके जरुर बताये ।

राजस्थानी लोक साहित्य में नीतिगत तत्वों की बात करे तो पता चलता है कि राजस्थानी लोक साहित्य समृद्ध है तथा प्रत्येक मनुष्य के लिये नैति...

अवसर को पहचानिए और बनिए विजेता How to succeed in life


जीवन मे आने वाले उतार - चढ़ाव जिस व्यक्ति को परेशान नही करते ,वो ही विजेता बन सकता है । विपरीत परिस्थिति मे हि विजेता की पहचान होती है । मुश्किल हालात मे भी विजेता हिम्मत और मेहनत से अवसर बनाते है । काम के प्रति उनकी ललक और कमिटमेंट उनको भीड़ से अलग बनाता है । यदि आप अपने आप को सफल बनाना चाहते है तो आपको अपने आसपास बिखरे हुए अवसरो पर नजर दौड़ानी होगी । और उन अवसर को सफलता मेह बदलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी ।  अपने सपने साकार करने के लिए खुद को कड़ी मेहनत करनी जरूरी होती है । इसलिए हमेशा खुद को motivate करते रहे और अपने काम मे लगे रहे ।

How to be successful in life


विचार नही , कर्म करे 
    जब साधारण व्यक्ति चीजों को मंत्रमुग्ध हो कर देखते रहते है , तब असाधारण व्यक्तित्व के धनी लोग उन चीजों की Help से अपने सपनो को पूरा करने का रास्ता तैयार करते है । विजेता हमेशा किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचाने मे माहिर होते है । वे छोटी मोटी परेशानी से घबराते नही है बल्कि उनका डटकर के सामान करते है । विजेता कर्म पर ध्यान देते है । इसलिए यदि आप life मे success होना चाहते है तो विचार मत किजिये कर्म किजिए । जिससे आप अपने सपने पूरे कर सकते है । गीता मे भी लिखा हुआ है कि " हमे कर्म करते रहना चाहिए , फल की इच्छा नही करनी चाहिए ।"
आप जिस work मे success होना चाहते है उस मे अपनी पूरी ऊर्जा लगा दे तो आप निश्चित ही  सफल होगे ।

रिस्क लें, मिलेगी सफलता 
    विजेता आमतौर पर बड़ी रिस्क लेना पंसद करते है । उन्हे जब भी कही अवसर दिखाई देते है वे हाई रिस्क और हाई रिवार्ड के माध्यम से उनका विस्तार करते है । क्योंकि वे जानते है कि रिस्क लेने से life मे कुछ बेहतर पा सकते है । हो सकता है की सभी काम मे उन्हे सफलता नही मिलती, पर वे रिस्क लेना नही छोड़ते है ।
आप यदि life को बेहतर बनाना चाहते है तो रिस्क लिजिए । क्योंकि हम जानते है कि "डर के आगे जीत है।"  आज जितने भी successful लोग है सबने अपनी life मे रिस्क ली है तभी वे success हुए है।

कभी भी करे शुरुआत 
    यदि आप सोच रहे होंगे कि हम तो दुनिया से बहुत पीछे है अब अपना काम start करूंगा तो वो सफल होगा या नही ?
Dosto आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि "जब जागो तब सवेरा" इसलिए कोई भी work starts करने के लिए वर्तमान से Best Time कोई नही है ।
Google कोई पहला सर्च इंजन नही था , Facebook और Twitter कोई प्रथम Social Sites नही थी । money transfer और payment company PayPal भी पहली नही थी इसके बावजूद ये अपनी अपनी industry मे सफल हुई है । ऐसा इसलिए हुआ , क्योंकि इन्होंने कुछ नया पेश किया ।
इसलिए अब भी कोई देर नही हुई है आप कभी भी काम चालू कर सकते है । और अपनी मेहनत तथा कुछ नया करने की ललक आपको सफलता दिला सकती है ।

असफलता का सामना
     ऐसा कोई नही कहा सकता की winner कभी fail नही होते । उन्हे काफी असफलता मिलती है लेकिन वे अपनी स्प्रिट को कमजोर नही होने देते । वे हमेशा विफलता के बाद तेजी से उभरते है । विजेता हमेशा बड़े लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित करते है और वे धैर्य के साथ लगातार काम करते रहते है । तभी तो वे विजेता कहलाते है ।
  यदि हमे अपने जीवन मे असफलता मिलती है तो उससे घबरा कर बैठना नही चाहिए बल्कि नए जोश के साथ उस काम को करने मे दोगुनी ऊर्जा लगानी चाहिए ।  life मे असफलता सभी को मिलती है । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को कौन नही जानता ? वे कितनी बार चुनाव हारे ? इसके बावजूद उन्होंने अपना आत्मविश्वास तथा हौसला नही खोया और आखिर कार वे अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए । इसलिए असफलता को सफलता की सीढ़ी बनावे ।


आपको हमारा यह " अवसरों को पहचानिए और बनिए विजेता " लेख कैसा लगा अपनी राय comments box मे जरूर रखे ।


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जीवन मे आने वाले उतार - चढ़ाव जिस व्यक्ति को परेशान नही करते ,वो ही विजेता बन सकता है । विपरीत परिस्थिति मे हि विजेता की पहचान होती है । म...

मै और मैना का रहस्य Best inspirational story in hindi


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एक किसान के घर पर बकरी भी थी और मैना भी थी ।  दोनों ही बोलती रहती थी । किसान की old mother बकरी की ‘मै – मै ‘ आवाज सुनकर बहुत नाराज होती थी । उसे गुस्सा आता तो वह डंडा लेकर उस पर वार कर देती थी। कभी उसके कानो में मैना की मधुर आवाज गूंज उठती –“मैना, मैना, मैना....” वर्षो तक यह क्रम चलता रहा । एक दिन कबीरदास उस किसान के घर आये । 
किसान की बूढी माताजी ने कहा –“ कबीरदासजी ! आप तो अनुभवी संत हो महाराज ! मे परेशान हूँ की बकरी और मैना दोनों बोलते है पर जब बकरी की आवाज गूंजती है तब मुझे जरा भी नहीं सुहाती है।”
“ माताजी ! आपको बकरी की आवाज अच्छी नहीं लगती पर मैना की आवाज तो अच्छी लगती होगी ?” कबीरदासजी ने पूछा ।
“ हाँ महाराज ! मैना की मीठी मीठी आवाज से मै ही क्या हर सुनने वाला मस्त हो उठता है ।” वृद्धा बोली ।
“तो बताओ  मैया! मैना का गाना आपको इत्नस मीठा क्यों लगता है। ।"
“मै नही जानती बाबा पर यह बात ठीक है कि दूध देने वाली गाय की लात तो सही जाती है पर दूध देने वाली बकरी की बेसुरी आवाज नहीं सुनी जाती । आप ही बताइये बाबा कि ऐसा क्यों होता है । "वृद्धा ने अपनी बात तसल्ली से कही 
   तब कबीरदासजी ने समझाया –“ अम्मा जी दोनों ही अपने मन की बात कहती है । कहने के पीछे जो भाव है बस उसका ही फर्क है ।"  
 “कबीर महाराज! मै समझी नहीं यह फर्क क्यों है? आप जरा मुझे अच्छी तरह समझा दो ताकि मै बकरी से नाराज न रहूँ ।” वृद्ध ने आग्रह किया ।
कबीरदासजी ने तब समझाते हुए कहा –“ मेरी मैया ! मैना मीठे सुर में जब मै ना , मै न, मै ना कहती है तब मै नहीं , मै नहीं, इस बात को कहकर अपने मन के छोटेपन और संकुचित दृष्टिकोण से अनायास ही मुक्त हो जाती है । इसलिए उसके बोल सभी को अच्छे लगते है । इधर बकरी बोलती है तो ‘मै-मै-मै ‘ की आवाज गूंजती रहती है। इसलिए उसका बोलना अच्छा नहीं लगता । उसमे उसका अहं जो बोलता है ।"
          “ हाँ बाबा! मै अब समझ गई, अपने आपको संकुचित दृष्टिकोण से मुक्त रखना चाहिए ।"
   इस व्यावहारिक सत्य का वृद्धा को बोध करवाकर कबीरदासजी चल दिए अपनी रहा |

इस प्रसंग से हमें सीख मिलती है की हमें हमारे बोल मीठे रखने चाहिए और अहं भाव से ग्रसित बोल नहीं बोलने चाहिए , क्योकि लोगो को अच्छे वचन प्रिय होते है इसलिय तो कोयल और कौए का रंग एक होने के बावजूद लोग मीठे बोल बोलने वाली कोयल को पसंद करते है   

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गंगाजी धरती पर कैसे आई Best Hindi Story

         
रहस्यमयी कहानी
             
राजा सगर ने एक बार अश्वमेघ यज्ञ किया । अश्वमेघ यज्ञ के लिये जो घोडा छोड़ा था, उसे इन्द्र ने चुरा लिया ।  राजा सगर के पुत्र उस घोड़े को तलाश करने निकले । घोड़े को तलाश करते हुए सगर पुत्र कपिल मुनि के आश्रम के पास पहुंचे । सगरपुत्रो को कपिल मुनि के आश्रम के पास घोडा दिखाई दिया । उन्होंने कपिल मुनि को ही  चोर समझकर इसके लिये तिरिस्कृत किया ।  कपिल मुनि तपस्वी और पराक्रमी थे । मुनि का तिरिस्कार करने के कारण सगर पुत्र वही स्वत: जलकर भस्म हो गये ।
राजा सगर की दूसरी पत्नी से असमंजस नामक पुत्र हुआ । असमंजस के अंशुमान नाम का पुत्र पैदा हुआ । अंशुमन अपने दादा की सेवा करता था । अंशुमन अपने चाचाओ की खोज में निकला और खोज करता हुआ जब वह जा रहा था, तो उसे कपिल मुनि मिले ।  अंशुमान ने ऋषि को प्रणाम किया और उनकी स्तुति की । भगवान कपिल ने तब अंशुमान को बताया कि बेटा यह घोडा तुम्हारे पितामह का यज्ञ पशु है , इसे तुम ले जाओ । उन्होंने अंशुमान को उसके चाचाओं के भस्म होने की बात भी बताई | मुनि ने अंशुमान को उसके चाचाओं के उद्धार का उपाय भी बताया कि उनका उद्धार केवल गंगा जल से ही हो सकता है । अंशुमान वहा से अपने पितामह राजा सगर के घोड़े को लेकर आया । राजा सगर ने फिर अश्वमेघ यज्ञ पूरा किया ।

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अंशुमान ने अपने चाचाओं के उद्धार के लिये गंगाजी को लाने के लिये बहुत तपस्या की , पर सफल नहीं हुए । अंशुमान के दिलीप नामके पुत्र थे और दिलीप के पुत्र हुए भागीरथ । अंशुमान के पुत्र दिलीप ने भी गंगाजी को धरती पर लाने के लिए कठोर तपस्या की ।  परन्तु वे भी सफल नहीं हुए  । इसके बाद भागीरथ ने घोर तपस्या की । भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगाजी ने उससे वर मांगने को कहा । भागीरथ ने कहा मातेश्वरी आप मृत्यु लोक में जीवो का कल्याण करने के लिये धरती पर आएँ । गंगाजी ने कहा जब में धरती पर आऊ तो मेरा वेग धारण करने वाला भी कोई होना चाहिए ।  भागीरथ ने उत्तर दिया की भगवान शंकर आपका वेग धारण कर लेंगे । इसके बाद भागीरथ ने भगवान शंकर की तपस्या की और इसके लिये भगवान शंकर को प्रसन्न किया । भगवान शंकर ने गंगाजी को अपने सिर पर धारण किया । राजा भागीरथ आगे आगे चलते रहे और गंगाजी पीछे – पीछे । गंगासागर के संगम पर पहुंचकर गंगाजी ने राजा सगर के स्वत: जलकर भस्म हुए पुत्रों को अपने जल से पवित्र कर उनका उद्धार किया ।
         गंगाजी के बारें में कहा भी गया है-
   काया लाग्यो काट, सकलीगर सुधरै नहीं ।
   निर्मल होय शरीर , तो भेट्यां भागीरथी ।।

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ओशो का अनमोल विचार


      जब कोई तामीर बेतखरीब हो सकती नहीं ।
      खुद मुझे अपने लिए बरबाद होना चाहिए ।।

इस जगत में बिना मिटाए कुछ भी नहीं बनता । जब कोई तामीर बेतखरीब हो सकती नहीं , जब कोई चीज बन ही नहीं सकती बिना मिटाये, बिना विध्वंस के सृजन होता ही नहीं तो खुद मुझे अपने लिए बरबाद होना चाहिए ।मिटना होगा यदि स्वयं को पाना है । जलना होगा तुम्हे अगर ज्योतिर्मय हो जाना है । बीज मिटता है तो वृक्ष होता है , नदी मिटती है तो सागर हो जाती है । जिस घडी तुम मिटने को राजी हो गये , उसी घडी तुम्हारे भीतर परम का आविर्भाव हो जाता है। वह फिर कभी नहीं मिटता ।
तुम तो क्षणभंगुर हो , पानी के बुलबुले हो , बचे भी तो कितनी देर बचोगे ? मौत तो आ ही जाएगी, तो फिर अपने हाथ से छलांग क्यों नहीं लगा लेते । जो स्वयम मर जाता है वाही ध्यान को उपलब्ध होता है । समाधि आत्म मरण है । मरने से कोई शारीरिक मरने की बात नहीं है । शरीर तो बार बार मरा है , और फिर फिर तुम वापिस अगये । इस बार अहंकार को मरने दो कि फिर वापिस आना नहीं होगा । फिर तुम सुगत हो जाओगे, अर्थात जो ठीक ठीक चला जाता गया, फिर वापिस नहीं आता ।
                              ओशो


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       जब कोई तामीर बेतखरीब हो सकती नहीं ।       खुद मुझे अपने लिए बरबाद होना चाहिए ।। इस जगत में बिना मिटाए कुछ भी नहीं बनता । जब क...

प्रेरक प्रसंग आत्मविश्वास | inspiring story in hindi

                      आत्म विश्वास


कलकत्ता के प्रेसिडेंट college में उन्हीं students को स्थान प्राप्त होता था जो exam में अच्छे marks से pass होते थे| सन 1906 में प्रस्तुत college के प्रधानाध्यापक अंग्रेज सज्जन ने जो की बहुत तेज तर्रार थे, exam results सुनाया। एक student एकांत शांत स्थान में बैठा हुआ ध्यान से exam result सुन रहा था । एग्जाम रिजल्ट्स सुनने के बाद उस student ने headmaster से पूछा –“ आपने मेरा नाम क्यों नहीं लिया ? ” Headmaster ने उसे घूरते हुए कहा –“ तुम्हारा नाम लिस्ट में नहीं है | तुम Fail हो चुके हो । “
student ने स्वाभिमान के साथ कहा –“ यह कभी सम्भव नहीं है । मै निश्चय ही प्रथम श्रेणी में pass हुआ हूँ| संभव है भूल से आपने मेरा नाम नहीं लिया है ।”
प्रधानाध्यापक student की सत्य बात को सुन नहीं सके । उन्होंने कहा –“ तुमने मेरा अपमान किया है , अत: 5 रुपये तुम्हारे पर जुर्माना करता हूँ ।”

10 प्रेरक कथन | 10 Inspirational quotes in hindi 

किन्तु student अपनी बात पर अड़ा हुआ था । प्रधानाध्यापक sir जुर्माना बढ़ाते गये । यहाँ तक की 50 रुपयों तक का जुर्माना उन्होंने कर दिया लेकिन student विचलित नहीं हुआ ।
उसी समय college के प्रधान क्लर्क ने आकर सूचित किया की यह student कॉलेज में सर्वप्रथम आया है । असावधानी से इसका नाम सूचि में लिखने से रह गया। Headmaster ने सुना तो उनका सिर लज्जा से झुक गया और student का सिर स्वाभिमान से ऊपर उठ गया ।

उस student का नाम था राजेन्द्रप्रसाद जो भारत के आजाद होने पर सर्वप्रथम राष्ट्रपति बने  ।


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                      आत्म विश्वास कलकत्ता के प्रेसिडेंट college में उन्हीं students को स्थान प्राप्त होता था जो exam में अच्छे m...

10 प्रेरक कथन | 10 Inspirational quotes in hindi

Hello friends आज इस पोस्ट मे समाज और life से related 110 प्रेरक कथन पढेगे।

1. महत्त्व इस बात का नहीं कि और लोग क्या करते है। महत्त्व इस बात का है की हम क्या करते है ।
                                    श्री चन्द्रप्रभु

2. व्यक्ति पर होने वाले संस्कार , उसके आसपास का वातावरण, उसकी दृष्टि के सम्मुख रहने वाले आदर्श आदि सब कुछ समाज का ही ऋण है । उस समाज के हेतु व्यक्ति को अपना जीवन समर्पित करना चाहिए ।
                                   उमांकात केशव आप्टे

3. अपने लिये तो हर कोई मरता है, औरों की भलाई के लिये मरने का सौभाग्य तो विरलों को ही मिलता है ।
                                                श्री चन्द्रप्रभु

4. लोभ में असीम पाप भरा हुआ है । इस नीच लोभ ने किसको अपने वश में नहीं किया है? उससे आविष्ट हो जाने पर श्रेष्ठ राजा भी कौनसा बुरा कर्म नहीं कर सकता ? लोभी प्राणी पिता, माता, भाई, गुरु, एवं अपने बन्धुबांधवो को भी मार डालता है। इस विषय में कुछ भी अन्यथा विचार नहीं किया जा सकता है।                                                  वेदव्यास

5. हमारे जीवन मार्ग में अनेक आकर्षक प्रकाश हमें अपनी राह से खींचने के लिये चमकेंगे, कर्तव्य मार्ग से विचलित करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन हमारा यह कर्तव्य है की अपनी प्रगति की सुई को अपने वास्तविक लक्ष्य के ध्रुव तारे की ओर से कभी टलने न दें ।
                                         स्वेट मार्डेन

6. याद रखो कि न धन का मूल्य है, न नाम का , न विद्या का, केवल चरित्र ही कठिनाई रूपी पत्थर की दीवारों में छेद कर सकता है 
                                      स्वामी विवेकानन्द

7. अपने आपको जैसा आप बनाना चाहते है, उसी का मानसिक चित्र अपने सामने बनाकर रखिए, न की अपने सम्बन्ध में अपने डरो और शंकाओ का चित्र। जो चित्र अपने सामने आप निरंतर रखेंगे वही विचारों के सहारे निर्मित हो जाएगा, आप वैसे ही हो जांएगे।
                                       जानकीशरण शर्मा

 8. मनुष्य बड़ा होता है बड़ो की सेवा करने से बड़ो की आज्ञा पालन करने से ।
चरणों में तथा हाथों में विशेष शक्ति होती है; क्योकि उनमे रोम नहीं होते है । रोम होने से शक्ति कीलित हो जाती है । रोम न होने से शक्ति सीधे आती है ।इसलिए बड़ो के चरण स्पर्श करने चाहिए ।
                                  स्वामी रामसुखदासजी

 9. अपने को साधारण और दुसरे को विशेष समझने वाला सज्जन होता है ।
अपने को विशेष और दुसरे को साधारण , छोटा मानने वाला दुर्जन होता है ।
                                 स्वामी रामसुखदासजी

10. असंयम का एक क्षण – अपने आपको वश में न रख पाने का एक पल कई बार जीवन भर के स्नेह को कटुता में परिवर्तित कर देता है और उससे कई परिवार बंटकर बिखर जाते है ।
                                          स्वेट मार्डन

11. बचने का कोई रस्तान्न खुला हो तो मनुष्य डटकर संघर्ष करता है और उसके संकल्प में अटूट दृढ़ता आ जाती है । वह घोर कठिनाई व असहय कष्ट को भी सहन करता है।
                                                 
12 हमारी गलतिया हमे दिखने लगे, ऐसा प्रयास निरंतर जारी रखे ।

13 लक्ष्मी को माँ मानकर सत्कर्म में लगाएगे तो वह प्रसन्न होगी । यदि उपभोग की इच्छा से उसका दुरूपयोग करोगे तो वह लात मारेगी ।


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Hello friends आज इस पोस्ट मे समाज और life से related 110 प्रेरक कथन पढेगे। 1. महत्त्व इस बात का नहीं कि और लोग क्या करते है। महत्त्व इस बा...

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 10 आचरण सूत्र


Hello friends इस post मे हम हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दस आचरण सूत्र ( Harvard University's 10 Practices formula )  को पढेगे। 


Harvard university


●   सभी लोग चिंतन करके ही व्यवहार करते है, ऐसा नहीं है | वे जो कुछ करते है वह उचित ही होता है , ऐसा भी नहीं है | ज्यादातर लोग अपना ही विचार करके चलते है, बरतते है|
फिर भी...........उनके प्रति सद्भावना रखे, उनके साथ प्रेम से व्यवहार करें|

●  आप कुछ अच्छा करेंगे , तो लोग कहेंगे की ऐसा करने के पीछे भीतर से आपका हेतु स्वार्थ का है|
फिर भी.........अच्छा करना, भलाई की राह पर चलना चालू रखे|

● .यदि आप अपने कार्य में सफल होंगे तो निकम्मे मित्र आपको मिल जाएंगे |
फिर भी..........उनके प्रभाव में नहीं आकर , सफलता के लिये काम करते रहे |

●  आप आज जो कुछ अच्छा करेंगे , भलाई का काम करेंगे , वह कल भुला दिया जायेगा |
फिर भी..........अच्छा करते रहना , भलाई करते रहना चालू रखे|

● आप प्रमाणिकता से व्यवहार करेंगे , सत्य बातें करेंगे , तो आप आलोचना में फँस जाएँगे , आप विवाद के पात्र बनेगे |
फिर भी..........प्रमाणिकता का त्याग नहीं करना है | सच्चे बने रहे |

● उच्च विचारवान बड़े से बड़े व्यक्ति को भी एक संकुचित विचार वाला तोड़ दे ऐसा हो सकता है |
फिर भी.........उच्च विचार से लगे रहना , दृष्टि विशाल रखना|

● दीन व् भाग्यहीन के प्रति सब कोई दया भाव दिखाते है यह सच है, मगर ऐसे लोग भी धनिक व् भाग्यवान का ही अनुसरण करते है |
फिर भी...........गरीब व् भाग्यहीन के लिये लड़ता रहना |

● जिस ईमारत को बनाने में बरसों लगे हो, वह रात रात में जमींदोज हो जाए, ऐसा हो सकता है |
फिर भी इमारत बनाना चालू रखे |
● लोगो को वास्तव में help की आवश्यकता होती है | आप उनको सहायता करेंगे और वे आपको thanks कहने की बजाय आप पर हमला बोल दें, ऐसा भी हो सकता है |
फिर भी..........लोगो की सहायता करने में कभी पीछे मत हटना |

●  आपके पास जो श्रेष्ठ , वह संसार को देते रहो| बदले शायद लातें मिलेंगी |
फिर भी.........आपके पास जो श्रेष्ठ है, वह संसार को दे ही दें |



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Hello friends इस post मे हम हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दस आचरण सूत्र (  Harvard University's 10 Practices formula )   को पढेगे।  ...

युवा देखे है

       

            कविता


कविता युवा देखे है



नीली नीली आँखो से तीर निकलते देखे है
घायल पंछी की भांति तड़पते आशिक देखे है ।।

कोयल जैसी आवाज उसकी , रसगुल्ले जैसे होठ है ।
इन होठो पर मरते युवा देखे  है   ।।

बादाम जैसी आँखे उसकी , हिरणी सी चाल है ।
आँखो से आँखे लड़ाते नौजवान देखे है ।।

वो भाव देती नहीं , ( फिर भी) चींटी की तरह चिपकते है।
भारत माता पुकार रही , अनजान बनते युवा देखे है ।।

जिसने नौ माह पेट मे रखा , दि जमाने की हर खुशी।
उस माँ को "तेरी क्या औकात " कहते बेटे देखे है ।।

गाय माता दुख मे पुकार रही है ।
इश्क मे घायल युवाओ को अनजान बनते देखे है ।।

घायल पंछी की भांति तड़पते आशिक देखे है .....

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                 विरम सिंह सुरावा



                    कविता नीली नीली आँखो से तीर निकलते देखे है घायल पंछी की भांति तड़पते आशिक देखे है ।। कोयल जैसी आवाज उसकी , ...

जीवन के 5 शाश्वत सत्य | 5 truths of life in hindi

जीवन में कुछ सच ऐसे है जो शाश्वत है, स्वाभाविक है | ये सच बार बार हमारे जीवन में घटित होते है| जो हमें कभी रुलाते है, तो कभी हंसाते है | कभी हमें पीड़ा देते है | आज हम जीवन के 5 शाश्वत सच के बारे में जानेगे , जो हमारे सामने every day show होते है \
     
5 truths of life

                                  
1. मृत्यु और जीवन की नश्वरता :- जो जन्म लेता है उसका मरना निश्चित है और मरने वाले का पुन: जन्म आवश्यक माना है | यह प्रकृति का नियम है | शाश्वत सत्य है | मृत्यु life की सबसे बड़ी सच्चाई है | किसी न किसी जीव के जीवन में घटित होती रहती है | लेकिन जब हमारे मित्र की , आत्मीय जन की मृत्यु होती है तो हमें बड़ा अघात लगता है | इसका कारण उनमे हमारा मोह और अपनापन होता है| हम उनसे बिछुड़ना नहीं चाहते थे जिसके कारण हम वास्तविकता को नहीं स्वीकार पाते | इसके लिए जरुरी है की हम अपने जीवन को वर्तमान में जिये , होश में जियें और जीवन की वास्तविकता को स्वीकार करें |

20 success life tips in hindi 

2. परिवर्तन प्रकृति का नियम :- इस world में स्थाई कुछ भी नहीं है , हर पल कुछ न कुछ बदलता रहता है | आज हमारे पास जो कुछ है वह हो सकता है , कल न रहे और आज नहीं है , वह कल आ जाए | जीवन परिवर्तनशील है , गतिमान है, पल पल बदलता रहता है | जीवन में कभी खुशियों की फुलझड़ियाँ खिलती है तो कभी गम का मातम छा जाता है | परिवर्तन की इस धारा में वस्तु हो या व्यक्ति हो सबके स्वरूप में परिवर्तन आता है | किसी चीज का निर्माण होता है तो समय गुजरने के बाद उसका क्षरण भी हो जाता है | आज जो ख़ुशी की घड़ियाँ नसीब हुई है वे सदा नहीं रहेगी | आज जो दुःख के कांटे आ चुके है वे भी कल नहीं रहेगे | अत: व्यक्ति को हमेशा वर्तमान में जीना चाहिए , हमेशा आशान्वित रहना चाहिए | जीवन में हमेशा अच्छे work करते रहना चाहिए और जीवन की वर्तमान परिस्थितियों में खुश रहना चाहिए |

3. सफलता की राह में असफलता के कांटे :- जीवन में हम सभी success होने का प्रयास करते है | कभी सफलताका मिल जाती है , कभी असफलता मिल जाती है | असफलता हमारी किसी न किसी भूल या चुक के कारण मिलती है लेकिन इसके लियें मन में हीनता या कमजोरी नहीं लानी चाहिये | प्रायस निरंतर चालू रखना चाहिये क्योंकि गलतियाँ कभी जानबूझ कर नहीं की जाती बल्कि गलतियां हो जाती है | यदि हम असफलता के कारण निराश और हताश होकर घर बैठ जाएँगे तो कभी सफल नहीं हो पाएंगे | जीवन में गलती वही करता है और असफल भी वही होता है जो सफलता के सपने संजोता है | असफलता का , बाधाओं का सामना नहीं करेंगे तो सफल कभी नहीं होंगे | डरता है सो मरता है | सफल वही होता है जो हौसले बुलंद रखता है | तुफानो से टक्कर लेने की हिम्मत रखता है | गलतियों में सुधार करते हुए , असफलता से नसीहत प्राप्त करते हुए आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिये |

15 अनमोल वचन | 15 quotes to success in your life in hindi 

4. जैसा करोगे वैसा भोगोगे :- हर व्यक्ति को निर्णय लेने के लिए , अपना कार्य करने के लिये , अपना जीवन जीने के लिये अन्य लोग अपने मतानुसार सुझाव दे सकते है | दबाव बना सकते है | उसे सहायता कर सकते है | लेकिन अपने जीवन की यात्रा उसे स्वयं को ही तय करनी पड़ती है | इसलिए धैर्य , साहस , विवेक के साथ अपना कार्य करते रहना चाहिये क्योंकि धैर्य केवल प्रतीक्षा करने के लिए नहीं बल्कि जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण रखने के लियें होता है | हमारा जीवन हमारे निर्णयों का ही परिणाम है | चुनावों का नतीजा है | सुने सबकी लेकिन करें मन की | जो स्वयं के निर्णय से , अंतर आत्मा कि आवाज से निर्णय किया जाता है , वह नि:संदेह सफल होता है |

5. सोचने से नहीं करने से राह मिलती है :- हम योजनाएं बनाते है तरह तरह के विचार करते है लेकिन इतना सोच विचार करने के बाद उस कार्य को मूर्त रूप देना आवश्यक है | जो  
सोचते रहते है लेकिन करते नहीं है वे वाही रह जाते है और आगे बढ़ नहीं पाते है | हमारी पहचान जो कुछ हम सोचते है उससे नहीं बनती है बल्कि जो कुछ करते है उससे बनती है |
                साभार - संघ शक्ति

जीवन की ये most important बातें हमें सही जीवन जीने में , सही निर्णय लेने में सहयोग करती है | जीवन का वास्तविकता से परिचय करवाती है | हमें अपने प्रयासों को कभी पूर्ण नहीं समझना चाहिए बल्कि निरंतर प्रगति की तरफ , मंजिल की और बढ़ते रहना चाहिये |

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जीवन में कुछ सच ऐसे है जो शाश्वत है, स्वाभाविक है | ये सच बार बार हमारे जीवन में घटित होते है| जो हमें कभी रुलाते है, तो कभी हंसाते है | क...

रक्षाबंधन और आज का युवा वर्ग


दोस्तो रक्षाबंधन का त्योहार सदियो से मनाया जा रहा है । इसके पीछे कई घटना के बारे मे आप जानते ही होंगे । आज हम रक्षाबंधन क्यो मनाया जाता है ? और इसके पीछे की घटना के बारे मे जानकारी नही देगे । यह जानकारी आपके पास पहले से ही मौजूद होगी ।
Friends आज हम बात करेंगे " रक्षाबंधन और आज का युवा वर्ग ।"

 
रक्षाबंधन

रक्षाबंधन की जानकारी
रक्षाबंधन हमेशा श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है इस दिन को भाई-बहन का दिन भी कहा जाता है । श्रावण पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा भी कहते है । इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और बदले मे भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है ।
रक्षाबंधन के मौके पर केवल बहन ही भाई के राखी नही बांध सकती बल्कि भाई - भाई , बहन - बहन भी आपस मे राखी बांध सकते है ।

रक्षाबंधन और आज का युवा वर्ग

रक्षाबंधन को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का दिन माना जाता है लेकिन आज के कुछ युवा पीढ़ी इस पवित्र और पावन पर्व को भी मजाक का विषय बना रहे है ।
रक्षाबंधन के मौके पर WhatsApp और Facebook पर बहुत से ऐसे message आते है जिसमे इस पावन पर्व का मजाक उड़ाया गया होता है ।
Example - सावधान ☡
      किसी लड़की से कोई पैकेज नही लेवे
रक्षाबंधन पास मे है उसमे राखी भी हो सकती है ।

आप खुद विचार किजिए की ऐसे मैसेज किस मानसिकता के लोगो ने बनाए होगे ?

रक्षाबंधन आने वाला है और किसी को अनजान पैकेज से डर है और किसी को अपनी सुरक्षा बढानी है । अरे शर्म आनी चाहिए हिन्दुस्तान के निवासी होकर ऐसी बाते करते हो ।  यहाँ की नारी इतनी अबला नही है कि किसी अनजान को राखी भेज दे । यदि आपको राखी मिलती है। तो आपको गर्व करना चाहिए कि आपको किसी के भाई है।
"अरे एक राखी की कीमत क्या होती है उस भाई से पूछो जिसके कोई बहन नही है ।"
"अरे बहन की कीमत उससे पूछो जिसकी कलाई जन्म से आज तक सूनी है ।"

पहले रक्षाबंधन रक्षा सूत्र बांधने के निमित्त होता था लेकिन अब इस मे भी विकृति आ गई है । राखी के बदले रक्षा के वचन की जगह महंगे महंगे उपहार लिए और दिए जा रहे है ।
रक्षाबंधन पवित्र बंधन का त्योहार है इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना हमारा कर्तव्य है ।

आज के युवा वर्ग पर पश्चिमी संस्कृति इतनी हावी हो गई है कि वे बम से ज्यादा राखी बंधाने से डरते है । हम ने बचपन मे प्रतिज्ञा करते थे कि
   भारत मेरा देश है
समस्त भारतीय मेरे भाई बहन है ।
उस प्रतिज्ञा का क्या हुआ ?

 जबरदस्ती राखी बांधना 
     कई school and colleges मे रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है जिसमे लड़किया लड़को के राखी बांधती है यह तो अच्छी बात है । लेकिन इस पर्व मनाने का औचित्य तब खत्म हो जाता है जब लड़का राखी नही बन्धावना चाहता है परंतु जबरदस्ती बांध दी जाती है ।
ऐसी राखी बांधने से क्या फायदा ? क्या वो लड़का रक्षा का वचन देगा ? क्या वो दिल से इस रिश्ते को निभा पाएगा ?
इसलिए ऐसे राखी नही बांधना चाहिए क्योंकि इससे रिश्ते की अहमियत नही रह जाती है । ऐसे लोग जिनके मन मे राखी के प्रति सम्मान नही है ऐसे लोगो के राखी बांध कर धागा क्यो खराब करे ।

इस रक्षाबंधन पर क्या मांगे भाई से 
       बहनो निश्चित ही आप इस रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधगी । तो इस मौके पर भाई से केवल एक वचन ले कि :-
             हे मेरे बांधवा
       इस रक्षाबंधन पर मुझे वचन दे
  जितना सम्मान तुम मुझे देते हो उतना
सम्मान तुम सभी की बहनो को देना ।

ज्ञान द्रष्टा का निवेदन
रक्षाबंधन के मौके पर हो सकता है आपके पास भी ऐसे कुछ मैसेज आए तो उन्हे forward करने की बजाय delete करके एक भाई का फर्ज निभाए ।
 

आप के भी रक्षाबंधन और आज का युवा वर्ग पर मन मे कोई विचार हो तो कमेन्ट के माध्यम से शेयर करे ।


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दोस्तो रक्षाबंधन का त्योहार सदियो से मनाया जा रहा है । इसके पीछे कई घटना के बारे मे आप जानते ही होंगे । आज हम रक्षाबंधन क्यो मनाया जाता है...

वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


चन्द्रसेन राठौड़

मायड़ थारों वो पुत कठै
वो मरूधरा रो लाल कठै
वो मालदेवजी रो सपूत कठै
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै


मायड़ थारों वो पूत कठै...2

आजादी  खातिर जंगल जंगल घुमनीयों
वो आजादी रो दिवानो कठै ।
अकबर  री आँख रो काँटो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै....2

वो जुझेयों घणो अकबर री सेना रे आगे,
मान बचावण मरूधरा रो 
वो जोधाने रो शेर कठै ।
भाद्राजून और सिवाणा री धरा पर ,
अकबर ने  सबक सिखावण वालो
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै ।


नागौर दरबार मे रजपूती री आन राखनियों
वो मारवाड़ रो सूरज कठै ।
स्वाभिमान री अलख जगान जगानियों
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।


मायड़ थारो वो पूत कठै 
वो मरूधरा रो लाल कठै 
वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै ।

       विरम सिंह सुरावा


अन्य कविताएँ





चन्द्रसेन राठौड़ मायड़ थारों वो पुत कठै वो मरूधरा रो लाल कठै वो मालदेवजी रो सपूत कठै वो चन्द्रसेन राठौड़ कठै मायड...

कहानी - कुत्ते की सभा | story of democracy and reservation in forest


   कुत्ते की सभा :- जंगल मे लोकतंत्र और आरक्षण


आज जंगल मे बहुत चहल-पहल है । सभी जानवर जंगल के बीच मे बने कुएँ की तरफ अपने अपने परिवार के साथ तेज कदमो के साथ जा रहे थे ।
गोलू बंदर पेड़ो पर छलाँगे मारते हुए अपने परिवार के साथ तेजी से कुएँ के पास जाने की कोशिश कर रहा था । मोटू हाथी भी अपनी सुन्ड से रास्ते मे आ रही पेड़ो की टहनियों को तोड़ता हुआ कुएँ की ओर जा रहा था ।
गणेशजी का वाहन मूषक महाराज भी गणेशजी को बीच रास्ते मे ही छोड़ कुएँ की ओर जा रहे थे ।
इस प्रकार सभी जानवर कुत्ते के द्वारा आयोजित सभा मे भाग लेने के लिए सह परिवार कुएँ पर जा रहे थे ।

कहानी  अपाहिज कौन  | story apahij koun 

जंगल के सभी जानवर कुएँ के पास एकत्रित हो गए ।
जंगल के राजा शेर भी साथी जानवरो के कहने पर मिटिंग मे आए । सभी जानवर आपस मे कानाफूसी कर रहे थे कि आखिर यह सभा आयोजित क्यो की गयी है ।

जानवरो की उत्सुकता देखते हुए सभा के संचालक वैशाखनन्दन जी ने आगे आकर कहा - " मेरे जंगलवासी भाइयो आप जानते है कि जंगल मे कोई कानून नही है । शेर सदियो से हमारा राजा बना हुआ है । भाइयो आज मिटिंग इसलिए आयोजित की गई है जंगल की व्यवस्था को कैसे बदली जाए  और जंगल मे भी लोकतंत्र और आरक्षण लाए । "
इसलिए इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए हमारे बीच अभी अभी शहर से आए टाॅमी (कुत्ता ) जी है जो आपको इंसानो के शहर के बारे मे बतायेंगे ।



निमंत्रण पाकर टाई सूट पहने टाॅमी कुत्ते ने अपना भाषण शुरू किया - भाइयो आप यहा पर सदियो से अन्याय सहते आ रहे हो । भाइयो अब समय आ गया है हमे आवाज उठानी होगी । शहर मे कमजोरो को आगे लाने  की एक व्यवस्था है जिसे वहा आरक्षण कहते है । हमे भी ऐसी व्यवस्था जंगल मे लानी होगी । इसके लिए मुझे आपके साथ की जरूरत है आपकी की क्या राय है ?"

कुत्ते का भाषण सुन हिरण ने कहा - यह व्यवस्था इंसानो को अपनाने दो हमे इसकी आवश्यकता नही है । यह जंगल है इंसानो का शहर नही । यहा रेश मे घोड़ों के पांव मे जंजीर डालकर गधों को नही जिताया जाता ।"
सभी जानवरो ने ताली बजाकर हिरण की बात का समर्थन किया ।

कुत्ते ने समझाते हुए कहा -" तुम सब लोग अनपढ़ और गंवार हो इसलिए ऐसा  कह रहे हो । हमे इंसान से सीखना चाहिए , उन्होंने अपनी बुद्धि के बल पर कितनी तकनीक विकसित की है ।

मोटू हाथी ने चिंघाड़ मारते हुए जवाब दिया -" जो आरक्षण के लिए बहन बेटी की इज्जत तार तार करे , सड़क तोड़े , अपने ही देश को अपमानित करे ऐसे इंसानो से हम क्या सीखे ? जो कभी आपस मे प्यार से नही रह सकते , कभी धर्म के नाम और कभी राष्ट्र के नाम आपस मे लड़ते रहते है उस इंसान से क्या सीखे ? 
जो अपनी उच्च संस्कृति को छोड़ कर निम्न संस्कृति को अपनाए ऐसे इंसानो से हम क्या सीखे ? बताओ क्या सीखे हम ? 
हाथी का जवाब सुनकर कुत्ता बगले झांकने लगा ।

सभी जानवरो के जवाब सुनकर जंगल के राजा शेर ने कुत्ते से कहा कि तुम हमे इंसान के जैसा बनाने की कोशिश मत करना ।हम जंगली सही है । हम इंसानो की तरह आपस मे झगड़ते नही है । यहाँ सड़को पर कलियाँ नही मचली जाती  । यहा वृद्धो के लिए वृद्धाश्रम नही बनाय जाते । यहा पर राजनीति के नाम पर आपस मे नही लड़ते । 
तुम यहा से चले जाओ कही तुम पवित्र जंगल को भी इंसानो का शहर न बना दो । 

                      लेखक :- विरम सिंह सुरावा


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   कुत्ते की सभा :- जंगल मे लोकतंत्र और आरक्षण आज जंगल मे बहुत चहल-पहल है । सभी जानवर जंगल के बीच मे बने कुएँ की तरफ अपने अपने परिवार क...

हिरोशिमा परमाणु हमले पर कविता | poem on hiroshima atomic war in hindi

       
         हिरोशिमा कविता

उस दिन दुनिया मे मौसम आदमखोर हुआ
जिस दिन हिरोशिमा मे परमाणु विस्फोट हुआ
सुरज सबसे पहले किरणे जिस धरती को देता है
बोद्ध धर्म की उस नगरी मे भीषण नरसंहार हुआ ।।"

"6 अगस्त को अमेरिका अपनी औकात दिखा बैठा
बेकसुरो पर हमला करके अपनी जात दिखा बैठा
0.7 ग्राम यूरेनियम का यह परिणाम हुआ देखो
पल भर मे ही लाखो लोगो का नरसंहार हुआ ।।"

अमेरिका ने ना सोचा समझा दुष्परिणामो को
अधिकारो के अंधेपन ने मानवता को झकझोर दिया
हिरोशिमा अगणित बलिदानो की धरती है
द्वितीय विश्व युद्ध के दुष्परिणामो की अभिव्यक्ति है

poem heroshima
heroshima atom attack


हिरोशिमा है जहां रूदन है बच्चो की किलकारी मे
जहाँ बच्चे जन्म से सहमे सहमे दिखते है 
विकलांगता के दंश को जीवन भर सहते है
हिरोशिमा है जहाँ की धरती बंजर बर्बाद हुई
हिरोशिमा है जहाँ प्रकृति का विध्वंस हुआ 
हिरोशिमा है जहाँ अब पेड़ - पौधे नही उगते है 
हिरोशिमा है जहाँ पानी विषदूषीत सी रहता है
रेडियोएक्टिव किरणों से जनजीवन बर्बाद हुआ
हिरोशिमा है जहाँ सभ्यता का विध्वंस हुआ
हिरोशिमा है जहाँ गर्मी से पानी सुख गया 
हिरोशिमा है जहाँ जीवो का सर्वनाश हुआ
हिरोशिमा है जहाँ उगता सुरज भी फीका है 
हिरोशिमा है जहाँ मानवता का सिर झुक जाता है

दिल दहला देती है करतूते अमेरिका की
आँखो मे आँसू लाती है हालत मरने वालो की
कुछ वधूओं की कुमकुम बिन्दी वापस लौट नही पायी
कुछ बहनो की राखी जल गयी होगी विस्फोटो मे
कुछ माताओं ने अपने पुत्रों को खोया होगा
कुछ पिताओं ने अपने बच्चो का बलिदान दिया
कुछ बच्चो ने तो अपनी दुनिया ही खोयी होगी
माता-पिता को खोकर , अनाथ अभिशाप लिया होगा
काव्य नही , मेरी यह श्रद्धा सुमन अभिव्यक्ति है
हिरोशिमा बलिदानो को आत्मशान्ति अभिव्यक्ति है
क्या रूस को डराने का यह तरीका बहुत जरूरी था 
लाखों निर्दोषों का हत्यारा बनना बहुत जरूरी था 
महत्वकांक्षओ और वर्चस्वों के इनके युद्धो मे 
क्या बेकसूर लोगो का मारा जाना बहुत जरूरी था 

सिर्फ पल दो पल की चर्चा कर दी इस दुर्घटना पर
इतना घमंड में होना भी अच्छी बात नहीं
कि एक माफी भी ना मांग सको तुम इस दुर्घटना पर

मै कलम सिपाही चारण और क्या कह सकता हूँ
शब्द - सुमन श्रद्धा के अर्पित करता हूँ
काव्य नही , मेरी यह श्रद्धा सुमन अभिव्यक्ति है
हिरोशिमा बलिदानो का आत्मशान्ति अभिव्यक्ति है

om Singh  poem


           ओम सिंह चारण ' देवीपुत्र'





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                  हिरोशिमा कविता उस दिन दुनिया मे मौसम आदमखोर हुआ जिस दिन हिरोशिमा मे परमाणु विस्फोट हुआ सुरज सबसे पहले किरणे जिस धरती...